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कहते हैं पैसे की चाह इंसान से कुछ भी करवा सकती है, चाहे वो किसी की हत्या या फिर आत्महत्या हो। कुछ ऐसा ही मामला गुजरात के बनासकांठा से सामने आई है। जहां एक लड़के ने पिता द्वारा पैसे न देने पर हॉस्पिटल की तीन मंजिला इमारत से छलांग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

दरअसल, ये पूरा मामला बनासकांठा के पालनपुर डॉक्टर हाउस का है। डॉ गौतम पटेल  के वहाँ कंपाउंडर पर कार्यरत पिता के पास पैसे लेने आए लड़के को पिता ने पैसे देने से मना कर दिया। जिससे लड़का हॉस्पिटल की तीसरी मंजिल पर चढ़ गया। आस-पास के लोगों ने मामला गंभीर होते देख फौरन पुलिस को बुला लिया। घंटे भर से लोगों के समझाने के बावजूद जब लड़का नहीं माना तो पुलिस ने नीचे नेट लगा दिया जैसे ही लड़का कूदा सीधे नेट पर जा गिरा जिससे उसकी जान बच गई।

घंटे भर से चले इस ड्रामे को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ लग गई। लड़के ने जैसे ही छलांग लगाई लोगों ने उसे अपने मोबाइल में कैद कर लिया बाद में इस Video को शोशल मीडिया पर डाल दिया, जो इस समय काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

जौनपुर के महादेवा कुसना गांव से एक बड़ा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल यहा एक महिला ने पुलिस के सामने आत्महत्या करने की कोशिश की। और पुलिस के सामने ही खुदको आग के हवाले कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने बड़ी समझदारी से महिला की जान बचाई। आपको बता दे ये महिला सड़क निर्माण का विरोध कर रही थी। और जब इसकी बात नहीं मानी गई। तो इसने आत्महत्या की कोशिश की।

पानीपत में सिरफिरे आशिक ने एकतरफा प्रेम में आईटीआई की एक छात्रा को गोली मारकर खुद के सीने में गोली मारकर आत्महत्या कर ली जहां युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि आईटीआई छात्रा के कमर से पेट तक गोली छूते ही गुजर गई और वह बाल-बाल बच गई। उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां पीड़िता का इलाज जारी है... और मृतक लड़के के परिजनों ने आईटीआई छात्रा के परिजनों पर बेटे की हत्या कराने का आरोप लगाया है। हालांकि पूरे मामलें में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और पुलिस का कहना है की मामला एक तरफा प्यार का जिसमें युवक की मौत है और युवती की जान बच गई।

इंदौर के मॉल में एक युवक ने चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि युवक मॉल में ही टिकट काउंटर पर काम करता था और एक युवती पर दोस्ती के लिए दबाव बना रहा था। युवती द्वारा असिस्टेंट मैनेजर को शिकायत करने पर युवक घबरा गया और उसने चौथे माले से छलांग लगा दी। जिसके बाद उसे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मामला इंदौर के तुकोगंज थाना क्षेत्र के एमजी रोड स्थित ट्रेजर आईलैंड मॉल का है जहां मॉल में की काम करने वाले युवक ने मॉल की चौथी मंजिल से कुद कर आत्महत्या कर ली। तुकोगंज पुलिस ने बताया की घटना सुबह सवा 11 बजे की है। मृतक की पहचान रवि (24) पिता भंवरलाल शाक्य के रुप में हुई है। असिस्टेंट मैनेजर के मुताबिक रवि मूलतः वार्ड 40 काली मोहल्ला श्यामपुर (सीहोर) का रहने वाला था। पिछले वर्ष जुलाई में ही उसने नौकरी ज्वाइन की थी। वह एक युवती से दोस्ती करना चाहता था। युवती तीन महीने पूर्व ही टिकट काउंटर पर काम करने आई थी।

उसने 10 दिन पहले युवती को प्रपोज भी किया था, लेकिन युवती ने उसे फटकार लगाई और प्रबंधन को शिकायत कर दी। उस वक्त सीनियर ने रवि को समझाया और कहा कि आइंदा शिकायत नहीं मिलना चाहिए। रवि ने इसके बाद भी युवती को परेशान करना बंद नहीं किया।

असिस्टेंट मैनेजर ने बताया कि युवती एमआईजी क्षेत्र में रहती है। बुधवार शाम वह एमजी रोड पर पानी बतासे खाकर लौट रही थी। तब रवि ने उसे रोका और मोबाइल नंबर मांगा। युवती ने उसे नंबर देने से इनकार कर दिया। युवती ने गुरुवार सुबह 11 बजे इसकी शिकायत साइड एडमिन से की। एटमिन ने रवि को तलब कर लिया। जैसे ही कर्मचारियों ने उसे एचआर चैंबर में बुलाया, वह घबरा गया और दौड़ते हुए चौथे माले से कूद गया।

घटना के वक्त मॉल में सैकड़ों लोग मौजूद थे। अन्य कर्मचारी उसे ढक्कनवाला कुआं स्थित निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

कुछ दिन पहले मुंबई के बीवाईएल नायर अस्पताल में हुई पायल तड़वी के आत्महत्या केस में एक नया मोड़ आ गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उसकी गर्दन पर चोट के निशान मिले हैं। रिपोर्ट में मौत की प्रारंभिक वजह गर्दन पर मिले चोट के निशान बताए जा रहे हैं। बता दें कि पायल तड़वी गायनोकोलॉजी (स्त्रीरोग) की पढ़ाई कर रही थी।

मुंबई की अदालत ने रिपोर्ट को देखते हुए बुधवार को तीनों आरोपी डॉक्टरों को गिरफ्तार कर दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। वहीं तड़वी के परिवार का कहना है कि इसे हत्या के तौर पर देखा जाए। तड़वी की मां की तरफ से वकील ने अदालत को बताया कि छात्रा की मौत की परिस्थितियां बताती हैं कि यह हत्या का मामला है।

पीड़िता के वकील ने अदालत में कहा, 'उसकी मौत की परिस्थिति और शरीर पर मिले चोट के निशान से हम यह कह सकते हैं कि यह हत्या का मामला है आत्महत्या का नहीं। पुलिस को इस मामले की जांच हत्या के तौर पर करनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को 14 दिनों का समय मिलना चाहिए।'

वकील ने अदालत में आरोप लगाया, 'आरोपी पीड़िता के शव को कहीं और लेकर गए थे और बाद में उसे अस्पताल लेकर आए। इसलिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ का संदेह है।' मुंबई सेशंस अदालत के मजिस्ट्रेट आरएम सदरानी इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। अभियोजक जय सिंह देसाई ने कोर्ट से 14 दिनों की अधिकतम हिरासत की मांग की है।

आरोपियों के वकील ने अदालत में आत्महत्या के लिए उकसाने की बात को खारिज करते हुए कहा कि तीनों को तड़वी की जाति का पता नहीं था। मामले को हत्या के तौर पर लेने का अनुरोध करने पर आरोपी भक्ति मेहर के वकील संदीप बाली ने कहा, जैसा कि अभियोजक का कहना है कि इसे हत्या के तौर पर माना जाना चाहिए। मैं कहना चाहता हूं कि सारी मेडिकल रिपोर्ट्स आने दीजिए।

मेहर के वकील ने आत्महत्या के लिए उकसाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह केवल तड़वी की मां के बयान के आधार पर है और कोई भी सबूत इसका समर्थन नहीं करता है। आरोपी हेमा आहूजा और अंकिता खंडेलवाल के वकील अबाद पोंडा ने कहा कि मृतका को उसकी सामाजिक पहचान के आधार पर परेशान किया जाता था। इस मामले को अब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट को हस्तांतरित कर दिया गया है।

कहते हैं ना कोई भी सामान खरीदने या बेचने से पहले उसकी जांच करना अच्छा होता है. ऐसी ही गलती हुई मेरठ के शुभम से जिसने बिना चेक किए कुछ दिनों पहले अपना फोन अनुज प्रजापति नाम के शख्स को बेच दिया था। फोन में शुभम की एक्स-गर्लफ्रेंड के साथ कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें सेव थीं। जिनको अनुज ने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

कंकड़खेड़ा पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल यह तस्वीरें जब महिला ने देखीं तो उसे काफी गुस्सा आया और उसने शुभम से बात की। इससे क्रोधित शुभम ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अनुज की हत्या कर दी। सीसीटीवी फुटेज और मौके से बरामद मोबाइल की मदद से पुलिस ने आरोपियों की पहचान की है।
 
दूसरी तरफ 35 साल की महिला मुजफ्फरनगर के गंगानहर कैनाल में शनिवार को अपने 5 साल के बेटे के साथ कूद गई। पुलिस का कहना है कि शायद फोटोज के वायरल होने के अलावा अनुज की हत्या के मामले में नाम आने से परेशान होकर महिला ने आत्महत्या करने का फैसला किया। गोताखोरों ने बच्चे को तो बचा लिया लेकिन महिला की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि महिला ने मरने से पहले अपने पति को एक फोन कॉल भी किया था।

वहीं शुभम और उसके एक साथी को सहारनपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एसएसपी ने बताया कि 5 संदिग्ध लोग 2 मोटरसाइकिलों पर सवार होकर जा रहे थे। इस दौरान जब पुलिस ने सिक्यॉरिटी चेक पर रुकने के लिए कहा तो उन्होंने पुलिस पर ओपन फायर शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दो संदिग्धों के पैर में गोली मारी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
 
महाराष्ट्र में एक शर्मशार करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला डॉक्टर ने सीनियर द्वारा बार-बार की जा रही रैगिंग से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

मामला मुंबई के नायर अस्पताल का है जहां जातिसूचक तानों और सीनियर्स के टॉर्चर से तंग आकर एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। महिला की पहचान 23 वर्षीय पायल ताडवी का रुप में हई। पायल के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते पायल की शिकायत पर गौर किया होता तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।

पुलिस ने इस मामले में पायल की सीनियर डॉक्टर्स डॉ. हेमा आहुजा, डॉ भक्ती अहिरे और डॉ. अंकिता खंडेलवाल पर केस दर्ज कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, गायनेकोलॉजिस्ट सेकंड ईयर की रेजिडेंट डॉक्टर पायल की मां ने बताया कि, “अगर अस्पताल प्रशासन ने इस मामले पर थोड़ी संवेदनशीलता दिखाई होती तो आज मेरी बेटी जिंदा होती।” सुसाइड करने से कुछ घंटे पहले पायल ने अपनी मां अबेदा से कहा था कि वह अपनी तीनों सीनियर की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।

वहीं पायल के पिता ने कहा, “शुरू के छह महीने सही थे। सीनियर्स और जूनियर्स के बीच हल्की नोंकझोक चलती रहती है, लेकिन पायल ने कभी नहीं सोचा था कि उसे इतना प्रताड़ित किया जाएगा। 2018 में जब उसके साथ ये सब हुआ, तो उसने इस बारे में हमें बताया। इसके बाद हमने उसके पति डॉ सलमान से बात की और सलमान कहा कि ये सब होता रहता है और पायल को इसे नजरअंदाज करना चाहिए।”

रिपोर्ट के मुताबिक पायल ने यह सब नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन सीनियर्स ने उसे प्रताड़ित करना बंद नहीं किया। आरोपित लड़किया अक्सर उसकी कास्ट और रिजर्व कोटे के जरिए मेडिकल में हुए उसके एडमिशन को लेकर उसे ताना मारती रहती थीं। पायल ने जब दोबारा इसकी शिकायत अपने परिजनों से की तो, उन्होंने अस्पताल प्रशासन से बात की। जिसके बाद आरोपित लड़कियों को चेतावनी दी गई और पायल को सलाह दी कि वह इस सब चीजों पर ध्यान देने के बजाए अपनी पढ़ाई पर फोकस करे। अस्पताल प्रशासन से शिकायत के बाद भी उन तीनों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।
नोएडा के पॉश इलाके में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुप्रीम टावर के फ्लैट नंबर 003 से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा तो लोगों के होश उड़ गए। पुलिस ने फ्लैट के अंदर से पति-पत्नि के शव बरामद किए है। फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है।

मामला नोएडा थाना-39 क्षेत्र के सेक्टर 99 का है. यहां सुप्रीम टावर के एक फ्लैट से पति-पत्नि के शव मिले हैं. स्‍थानीय पुलिस के मुताबिक इन दोनों शव की शिनाख्‍त दिल्ली के रहने वाले शशि त्यागी (58 बर्षीय) और रेनू (55 बर्षीय)  के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक शशि और उसकी पत्नी पिछले 3 साल से सुप्रीम टावर के फ्लैट में रह रहे थे।

पड़ोसियों ने बताया कि सुप्रीम टावर के फ्लैट नंबर 003 से बदबू आ रही थी जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने गेट तोड़कर शव को बरामद किया. शुरुआती जांच में पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं लग रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सालों से शशि की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और लाखों रुपये का कर्ज भी था। बीते 3 साल से ये पति-पत्नी एक वकील के फ्लैट में रहते थे। जांच में पुलिस को फ्लैट के अंदर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.

स्‍थानीय लोगों के मुताबिक शशि पर लाखों रुपये का कर्ज था। ऐसे में कर्ज देने वाले शशि से बार-बार पैसे मांगने उसके कमरे पर आते थे। इस कारण वह मेन गेट के पर ताला लगाकर रखते थे और पिछले गेट से आते जाते थे।

जेट एयरवेज बंद होने से कंपनी के 22 हजार से ज्यादा कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। इस स्थिति में टेक्नीशियन शैलेष कुमार सिंह खुद को संभाल में नाकाम रहे। उन्होंने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नालासोपारा में अपनी छत से कूद कर जान दे दी। जेट एयरवेज़ के 43 वर्षीय कर्मचारी शैलेष पेट के कैंसर से भी पीड़ित थे। उनके इलाज के लिए साथी कर्मचारी तब तक पैसों की व्यवस्था कर रहे थे, जब तक सैलरी नहीं आने से उन्हें कोई परेशानी नहीं हो।

बताया जा रहा है कि सिंह पिछले कुछ सालों से कैंसर से जूझ रहे थे। ग्राउंड सपोर्ट विभाग के 40 से अधिक कर्मचारी हर महीने पैसा इकट्ठा करते थे और अतीत में सिंह के राशन के बिलों का भुगतान कर रहे थे। हालांकि, साथी कर्मचारियों की खुद की तनख्वाह रुक जाने के बाद पिछले कुछ महीनों से वे बहुत मदद नहीं कर पाए। सिंह के सहयोगी अविनाश मिश्रा ने कहा कि मेरा भी होम लोन चल रहा है।

उन्होंने कहा कि एयरलाइन द्वारा मुहैया कराया गया चिकित्सा बीमा भी जल्द ही समाप्त हो गया था। सिंह के सहयोगियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में वित्तीय समस्याओं ने उन पर अतिरिक्त दबाव बना दिया था। शैलेष अपनी पत्नी, दो बेटे और बेटी के साथ आठ साल पहले नालसोपारा के ओसवाल नगरी में एक हाउसिंग सोसायटी में फ्लैट में जाने से पहले पास के चॉल में रहते थे।

पड़ोसियों के मुताबिक, सिंह ने एक साल से अधिक समय से बिल्डिंग के मेंटिनेंस के बकाए का भुगतान नहीं किया था। इसके अलावा उन्होंने होम लोन का भुगतान भी नहीं किया था। उनके बड़े बेटे राघवेंद्र ने कुछ महीने पहले ही पिता की देखभाल करने के लिए नौकरी छोड़ दी थी। उनके छोटे बेटे सौरभ सिंह भी जेट एयरवेज में कर्मचारी हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी जा रहे हैं और फिलहाल बातचीत करने की स्थिति में नहीं हैं।

जेट एयरवेज के बंद होने के बाद ये किसी भी कर्मचारी की आत्महत्या का पहला मामला सामने आया है। खुदकुशी से पहले शैलेष छत पर बैठे दिख रहे थे। लोगों ने उन्हें नीचे आने की गुहार लगाई, लेकिन कुछ ही देर बाद ही शैलेष सिंह छत से कूद गए। नेशनल एविएटर्स गिल्ड के उपाध्यक्ष आसिम वलियानी ने कहा कि शैलेश कुमार के सामने कोई चारा नहीं बचा था। यदि सरकार ने जेट एयरवेज के बिगड़ चुके हालात के मामले में दखल नहीं दिया, तो और लोग अपनी जान देने के लिए मजबूर होंगे।

 

उत्तर प्रदेश के आगरा में रेप की कोशिश के बाद गांव की पंचायत के फैसले से दुखी एक महिला ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. मरने से पहले सूइसाइड नोट में महिला ने लिखा, 'पंचों ने मेरे पति से जबरन राजीनामा लिखवा लिया था, जबकि मैं कार्रवाई चाहती थी.घटना के सामने आने के बाद हरकत में आए पुलिस-प्रशासन ने महिला को खुदकशी के लिए मजबूर करने वाले आरोपियों और पंचों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी.दरअसल आरोपी गांव की महिला प्रधान का रिश्तेदार है और प्रधान का पति पंचायत का सरपंच था.पंचायत में पीड़िता को न बुलाकर उसके पति को बुलाया गया और पंचायत ने महिला को ही दोषी ठहराते हुए उसके पति को थाने में दी गई तहरीर को वापस लेने का फरमान सुना दिया.जिससे आहत होकर महिला ने खुदकुशी कर ली.