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शुक्रवार देर रात को हुए 25 आईपीएस अफसरों के तबादले की कड़ी में अजय पाल को रामपुर का नया एसपी बनाकर सरकार ने उनके कंधों पर रामपुर में न सिर्फ क्राइम कंट्रोल करने की जिम्मेदारी डाली है, बल्कि बिगड़े बोल और तीखी जुबान से भाजपा सरकार पर हमला करने वाले सपा नेता के गुर्गों पर भी लगाम कसने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है।

मजे की बात ये है कि अजय पाल के रामपुर का एसपी बनाए जाने के बाद न सिर्फ उनके आलोचकों की बोलती बंद हुई है, बल्कि इस अफसर की आलोचना करने वाले स्वार्थी किस्म के ये आलोचक अब उनका गुणगान भी करने में जुटे हैं।

शामली के एसपी रहते हुए अजय पाल ने जिस तरीके से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप कार्य कर बदमाशों पर शिकंजा कसा और उन्हें उनकी उस सही जगह पहुंचाया।

प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन्हें भेजने की मंशा रखते थे। इसका नतीजा ये हुआ कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश से पलायन रोकने का दम भरा और उनके काम की खुले मंच से प्रशंसा की।

कैराना में पलायन को रोकने का सीएम ने अजय पाल को नोएडा का एसएसपी बनाकर ईनाम भी दिया।

लेकिन नोएडा में अजयपाल के 10 माह के कार्यकाल की उपलब्धियों को विरोधी हजम नहीं कर सके और उनके खिलाफ साजिश रचकर ऊंची पहुंच रखने वाले विरोधियों ने छोटे कार्यकाल के बाद ही अजय पाल का तबादला इलाहाबाद करा दिया।

लेकिन अजय पाल की काबिलियत को सरकारी तंत्र और तंत्र को चलाने वाले हुक्मरान ज्यादा दिन नजरअंदाज नहीं कर सके और सरकार को नई जिम्मेदारी के साथ उन्हें फिर से फील्ड में बदमाशो के खिलाफ में उतारना पड़ा।

नोएडा के पॉश इलाके में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुप्रीम टावर के फ्लैट नंबर 003 से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़ा तो लोगों के होश उड़ गए। पुलिस ने फ्लैट के अंदर से पति-पत्नि के शव बरामद किए है। फिलहाल पुलिस ने दोनों शवों को पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच कर रही है।

मामला नोएडा थाना-39 क्षेत्र के सेक्टर 99 का है. यहां सुप्रीम टावर के एक फ्लैट से पति-पत्नि के शव मिले हैं. स्‍थानीय पुलिस के मुताबिक इन दोनों शव की शिनाख्‍त दिल्ली के रहने वाले शशि त्यागी (58 बर्षीय) और रेनू (55 बर्षीय)  के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक शशि और उसकी पत्नी पिछले 3 साल से सुप्रीम टावर के फ्लैट में रह रहे थे।

पड़ोसियों ने बताया कि सुप्रीम टावर के फ्लैट नंबर 003 से बदबू आ रही थी जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने गेट तोड़कर शव को बरामद किया. शुरुआती जांच में पुलिस का कहना है कि इस मामले में किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं लग रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ सालों से शशि की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और लाखों रुपये का कर्ज भी था। बीते 3 साल से ये पति-पत्नी एक वकील के फ्लैट में रहते थे। जांच में पुलिस को फ्लैट के अंदर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.

स्‍थानीय लोगों के मुताबिक शशि पर लाखों रुपये का कर्ज था। ऐसे में कर्ज देने वाले शशि से बार-बार पैसे मांगने उसके कमरे पर आते थे। इस कारण वह मेन गेट के पर ताला लगाकर रखते थे और पिछले गेट से आते जाते थे।