अनोखा ‘चाईनीज़ काली मंदिर ’,यहां मां को चढ़ता है चाउमीन और चॉप्सी वाला प्रसाद

-करिश्मा राय तंवर

 

आज तक आपने मंदिरों में तरह-तरह के मिठाई और पकवान के भोग लगते हुए तो देखा होगा, लेकिन आज हम आपको पश्चिम बंगाल में मौजूद एक ऐसे अनोखे काली मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जहां मां को नूडल्स और मोमोज के भोग लगाए जाते हैं. कोलकता में स्थित इस मंदिर को ‘चाइनीज काली टेंपल’ कहा जाता है. लेकिन यहां के अनोखे प्रसाद के पीछे क्या है मान्यता चलिए आपको बताते हैं.

 

कहते हैं भारते विविधताओं का देश है यहा अनेक ऐसे मंदिर और तीर्थस्थल है जो अपनी अनोखी मान्यता और अटूट श्रद्धा के लिए जाने जा रहे हैं. ऐसा ही एक मंदिर कोलकाता में है जिसके प्रसाद की चर्चाएं दूर-दूर तक होती है. दरअसल यह मंदिर कोलकाता का दिल कहे जानेवाले तंगरा इलाके में भारतीय चाइना टाउन है. जहां भारतीय और चाइनीज परंपरा का मिला-जुला स्वरूप देखने को मिलता है. यहां स्थित काली मंदिर को ‘चाइनीज काली टेंपल’ कहा जाता है. जिसकी खासियत है यहा पर देवी मां को चढ़ाए जाने वाला प्रसाद….

आपको बता दें कि यहां देवी को नूडल्स और मोमोज का भोग अर्पित किया जाता है. मां का यह मंदिर अपने प्रसाद के कारण विश्व में प्रसिद्ध है. यहां आने वाले भक्तों में चीनी मूल के लोग अधिक होते हैं.

यह मंदिर दो संस्कृतियों का मेल ही नहीं बल्कि आपसी सद्भाव को भी बढ़ाता है. क्योंकि काली पूजा के दिन चाइनीज भी अपने भारतीय पड़ोसियों के साथ काली पूजा में भाग लेने के लिए काम से छुट्टी लेकर मंदिर प्रांगण में इक्ट्ठा होते हैं.

60 साल पुराना है यह अनूठा मंदिर

देश का एक मात्र चाइनीज काली मंदिर को लेकर कहा जाता है कि 60 साल पहले यहां किसी भक्त ने दो काले पत्थरों पर सिंदूर लगाकर पेड़ के नीचे रखा था. हालांकि 12 साल पहले इस जगह पर मंदिर का निर्माण कर वहां मां काली की दो प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है.

मंदिर के इतिहास

जब भारत में ब्रिटिश शासन था, तब चीन से कई व्यापारी यहां आए, उनमें से कई लोग यहीं रहने लगे. चूंकि बंगाल में काली पूजा बहुत धूमधाम से की जाती है, इसलिए चीनी लोग भी मां काली की शक्ति में श्रद्धा रखने लगे.

मंदिर को लेकर यह है मान्यता

एक चीनी दंपति के 10 साल के बेटे की तबीयत बेहद खराब हो गई थी. कई जगह इलाज कराने के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा था. इसके बाद वह दंपति इस पेड़ के नीचे बैठे और उन्होंने कई रातों तक मां से बच्चे को बचाने की प्रार्थना की. इसके बाद चमत्कार हुआ और बच्चा स्वस्थ्य हो गया. इसके बाद इस जगह को लेकर लोगों की आस्था पैदा हो गई.

भक्तों को मिलता है चाउमीन और नूडल्स वाला प्रसाद

इस मंदिर में प्रार्थना करने आने वाले लोगों को प्रसाद के तौर पर नूडल्स दिया जाता है. इसके साथ ही, चॉप्सी, चावल और सब्जियों से बनी डिशेस का भी मां काली के चरणों में भोग लगाया जाता है. इसके अलावा एक और अनोखा रिवाज जो इस मंदिर में निभाया जाता है. मंदिर में आने वाले भक्त मंदिर परिसर में ही हाथ से बने पेपर को जलाते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी आत्माएं उनसे दूर रहती हैं.

इस मंदिर में सभी हिंदू रीतियों का पालन किया जाता है. सभी भक्त अपने जूते-चप्पल मंदिर के बाहर खोलकर ही मंदिर में प्रवेश करते हैं. साथ ही मां काली के आगे दीपक भी जलाया जाता है.

 

 

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