इस दरगाह में मौजूद है चमत्कारी पत्थर, 90 किलो के पत्थर को लोग उठाते हैं एक उंगली पर!

-करिश्मा राय तंवर

 

आज के समय विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है कि अब जादू और चमत्कार जैसे शब्दों पर जल्दी कोई यकीन नहीं करता है बावजूद इसके कुछ लोगों का मानना है कि इस धरती पर कुछ ऐसी शक्तियां मौजूद है जिन्हें हम देख तो नही सकते लेकिन उसके होन का एहसास होता है.

 

 

आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे जानने के बाद शायद आप यकीन ना कर पाए. दरअसल, हम बात कर रहे हैं पुणे स्थित ‘बाबा हजरत कमर अली की दरगाह’ के बारे में जिसका चमत्कार आप अपनी आँखों से देख सकते हैं. हजरत कमर अली एक सूफी थे जिनका निधन मात्र 18 साल की उम्र में हो गया था. उन्हें उनकी मृत्यु के बाद संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था. इस दरगाह में सूफी संत की चमत्कारिक शक्तियां आज भी विद्यमान हैं. इसका जीता जागता उदाहरण दरगाह परिसर में रखा करीब 90 किलो का पत्थर है.

 

 

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा संभव कैसे हुआ, तो आपको बता दें कि यह एक संत द्वारा दिया गया पत्थर है, जिसे केवल मस्जिद के प्रांगण में ही उठाया जा सकता है.

दरअसल महाराष्ट्र के पुणे से महज कुछ दूरी पर है शिवपुर. इस शिवपुर में एक दरगाह है कहतें है की यह दरगाह तकरीबन 800 साल पहले एक अखाड़ा हुआ करता था. इसी जगह पर पहलवानों की टोली इकठ्ठा होती और वर्जिश करती थी. लेकिन वर्जिश के बाद यहां के कुछ पहलवान एक सूफी संत जिनका नाम कमर अली का उपहास उड़ाया करते थे.

 

पत्थर से जुड़ी कहानी

कहतें हैं पहलवानों के उपहास के कारण सूफी संत कमर अली काफी नाराज हुए. उन्होंने 90 किलो के पत्थर में मंत्र फूंक दिया. मंत्र फूकने के बाद से इस पत्थर को अब तक कोई अकेला शख्स नहीं उठा सका है. उसके बाद कई लोगों ने भरसक कोशिश की लेकिन अकेले एक आदमी के बस में नही था की वो इस पत्थर को टस से मस कर सके. हालांकि सूफी संत कमर अली का नाम लेने के बाद इस पत्थर को सिर्फ 11 लोग अपनी एक उंगली के सहारे उठा के हवा में उछाल देते हैं.

 

 

सिर्फ दरगाह के अंदर उठा सकते हैं पत्थर

एक खास बात ये भी है कि इस पत्थर को दरगाह से बाहर ले जाकर उठाने की कोशिश की जाये तो यह टस से मस भी नहीं होता है. फिर चाहे आप कितने ही ताकतवर इंसान क्यों न हो. यही वजह है कि आज भी यह पत्थर अपने आप में किसी रहस्य से कम नहीं है.

 

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