चंडीगढ़, 24 मई (नवदीप छाबड़ा)- शिरोमणी अकाली दल ने आज उस करोड़ो रूपए के बीज धोटाले की केंद्रीय जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच करवाए जाने की मांग की है, जिसमें जेल मंत्री सुखजिदंर रंधावा के एक करीबी साथी द्वारा बिक्री की मंजूरी लिए बगैर धान के ब्रीडर बीज तैयार करके हजारों किसानों को बेहद ऊंची कीमतों पर बेचने का खुलासा हुआ है।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस घोटाले के बारे जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में 11 मई को कृषि विभाग द्वारा दर्ज करवाई एफआईआर के बावजूद एक कुल्फियां बेचने वाले से बीज उत्पादक बने लक्की ढ़िल्लों के खिलाफ इसीलिए कोई कार्रवाई नही की गई, क्योंकि उसे सुखजिंदर रंधावा का संरक्षण प्राप्त है। उन्होने लक्की ढ़िल्लों की तत्काल गिरफ्तारी तथा लकीज् सीड कारखाने में तैनात सीड इंस्पैक्टर को तत्काल बर्खास्त करने की भी मांग की तथा साथ ही पीएयू लुधियाना के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा जिन्होने भारी उत्पादन के लिए ब्रीडर सीड जारी किया था। उन्होने कहा कि जांच एजेंसी को इस बीज घोटाले में मंत्री की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि दोषी पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ को भी जानता है, जिसने किसान समर्थक होने का दावा करने के बावजूद अभी तक यह मुद्दा नही उठाया है। उन्होने यह भी मांग की कि सरकार को किसानों को इस नकली बीज का इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए तथा बदले में उन्हे बीजने के लिए कोई वैकल्पिक बीज मुफ्त देना चाहिए।

अन्य जानकारी देते हुए सरदार मजीठिया ने कहा कि किसानों द्वारा कृषि विभाग को दी जानकारी कि एक नकली बीज, जिसे पीएयू ने प्रमाणित नही किया है, को पीआर-128 तथा पीआर-129 किस्मों के तौर पर बाजार में उतारने के बाद 200 रूपए प्रति किलो बेचा जा रहा है, के बाद विभाग ने लुधियाना में एक एफआईआर दर्ज करवाई थी। उन्होने कहा कि यह दोनो ही ब्रीडर किस्में हैं, जिन्हे प्राईवेट एजेंसियों द्वारा बेचने की मंजूरी नही मिली है तथा इन्हे पीएयू द्वारा बेहद कम मात्रा में 70 रूपए प्रति किलो के दाम पर बेचा जाता है।

अकाली नेता ने कहा कि लुधियाना में बराड़ सीड फार्म पर एक छापा मारा गया था तथा पीआर-129 किस्म का 750 क्विंटल से ज्यादा बीज तथा पीआर-128 किस्त का 100 क्विंटल बीज जब्त किया गया था। उन्होने कहा कि बिल बुक से यह भी खुलासा हुआ था कि यह बीज करनाल सीड कंपनी द्वारा तैयार किया गया था। उन्होने कहा कि इस संबधी की जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि करनाल सीड कारखाना वास्तव में डेरा बाबा नानक के एक गांव वीरोके में लगाया हुआ था तथा इसका मालिक सुखजिंदर रंधावा का निकटतम सहयोगी लक्की ढ़िल्लों था। उन्होने कहा कि यह सीड कंपनी सिर्फ दो साल पहले शुरू की गई थी तथा अभी तक बिना कोई बोर्ड लगाए गुप्त तौर पर काम करती थी। उन्होने कहा कि सिर्फ इतना ही नही , अब यह बात सामने आई है कि करनाल सीड कंपनी में तैयार होते बीजों को प्रमाणित घोषित करने वाला सीड इंस्पेक्टर भी मंत्री के गांव धारोवाली का था तथा उसे 2018 में भर्ती किया गया था। उन्होने कहा कि इस सीड इंस्पेक्टर की मिलीभगत के कारण यह हुआ कि करनाल सीड के सभी बैग पर टैग लगे होते हैं ताकि इस अवैध कारोबार पर पर्दा डाला जा सके।

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