किसान आंदोलन, सरकार और सुप्रीम कोर्ट, जानें क्या क्या हुआ

 

किसान आंदोलन पर सरकार और किसान आमने सामने हैं, हों भी क्यों न, लड़ाई नाक की जो आ बैठी है, सरकार कहती है कानूनों को वापस नहीं लेंगे, किसान कहता है कानून वापस नहीं होंगे तो हम नहीं हटेंगे, दौर पर दौर किसान और सरकार के बीच बातचीत हो रही है लेकिन हल नहीं निकल रहा तो हल निकालने के मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा, अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुनवाई शुरू हुई, और जब सुनवाई पूरी हुई तो कोर्ट की सरकार से निराशा साफ नज़र आई, और कोर्ट ने साफ कह दिया कि आप कानून होल्ड करेंगे या हम करें, इसके अलावा तमाम बातों का जिक्र आज की सुनवाई खत्म होने तक कोर्ट ने कह दिया, ज़रा समझिए क्या कुछ बड़ी बातें कोर्ट ने कहीं

हम बहुत निराश हैं पता नहीं सरकार मामले में ढील कैसे कर रही है

किसानों से किस तरह की बात की जा रही है, कौन सा समझौता किया जा रहाहै

लोग मर रहे हैं आप हल नहीं निकाल रहे हैं

आंदोलन हिंसा में तब्दील हो सकता है 

कृषि कानून को होल्ड कर रहे हैं या नहीं

अगर आप नहीं कर सकते हैं तो हम कर देंगे

हम फिलहाल इतने पुराने संसोधन पर रोक नहीं लगाने जा रहे

कृषि कानून को लेकर किसानों के आंदोलन पर केंद्र सरकार के रवैये से सुप्रीम कोर्ट निराश है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि कानून आप होल्ड करेंगे या फिर हम करें. कोर्ट ने पूछा कि क्या यह नया कृषि कानून कुछ दिन के लिए होल्ड नहीं किया जा सकता, क्योंकि हमें नहीं पता है कि किसानों और सरकार के बीच क्या बातचीत चल रही है.

किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई आदेश नहीं सुनाया है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज का नाम सुझाने को कहा जो कमेटी की अगुवाई करेंगे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम कमेटी का गठन करें और किसान वहां जाकर प्रोटेस्ट करें। सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से सवाल किया कि अगर वो सरकार से बात कर सकते हैं तो कमेटी का विरोध क्यों कर रहे हैं।

इससे पहले आज केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि हम सरकार के रवैये से बहुत निराश हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि किसानों से किस तरह की बात चल रही है, क्या हो रहा है?

केंद्र और किसान संगठनों के बीच सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान निकलता नजर नहीं आया क्योंकि केंद्र ने विवादास्पद कानून निरस्त करने से इनकार कर दिया था जबकि किसान नेताओं ने कहा था कि वे अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं और उनकी ‘घर वापसी’ सिर्फ ‘कानून वापसी’ के बाद होगी। केंद्र और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है। वहीं, किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे 26 जनवरी को दिल्ली में परेड निकालकर रहेंगे। किसान नेता राकेश टिकैत कह चुके हैं कि एक तरफ तोप की परेड निकलेगी तो दूसरी ओर किसान अपने ट्रैक्टरों से परेड में हिस्सा लेंगे।

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