आज भले ही मानव ये कहने में संकोच न करता हो कि उसने विकास की नई इबारत लिख दी है, लेकिन सही अर्थों में मानव का विकास तब माना जाएगा जब महिलाओं को उसका उचित सम्मान मिल सकें।

महिलाओं का जिस्म महज़ एक खिलौना

जिस प्रकार जब किसी बच्चे को खिलौने की जरुरत पड़ती है तो वह तुरन्त खिलौना खरीद लेता है, ठीक उसी तरह विश्व में आज भी कई ऐसी जगह हैं, जहां मामूली खिलौने से भी कम दामों में महिलाओं की इज्जत वाला खिलौना मिल जाता है, जिसे खरीदकर हवस का दंरिदा हवस का घिनौना खेल खेलता है।

कहां हो रहा है, ये अपराध

कहने को तो एशिया महाद्वीप के बाद अफ्रीका महाद्वीप का नाम आता है, लेकिन विकास के दौड़ में एशिया से वह काफी पीछे है। अफ्रीका महाद्वीप के ये देश है दक्षिण अफ्रीका, अंबोला, जिंबाब्बे, नाइजीरिया आदि। इन देशों की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि अपना पेट पालने के लिए यहां की नाबालिक से अधेड़ उम्र की लड़कियों को 22 रुपये लेकर 70 रुपये तक में अपनी जिस्म की नुमाइश उन भेड़ियों के सामने करना पड़ता है, जिसने कहने को तो पुरुष का चेहरा अख्तियार किया हुआ है।

किसने लाया इस सच्चाई को बाहर

विश्व में लोगों की मदद करने वाली अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व विजन ने इस सच्चाई को विश्व के पटल पर लाने का काम किया है। उनका कहना है कि इन देशों में राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक व्यवस्था चरमरा सी गई है, जिसके कारण ही ऐसा हुआ है। इसके अलावा इन देशों में खाद्य सामग्री की भी काफी किल्लत हो गई है।

अफ्रीका में एड्स से संक्रमित है सबसे ज्यादा लोग

जैसा कि इन देशों में देह-व्यापार अपने मर्जी के साथ-साथ जबरदस्ती भी किया जाता है। इसी वजह से एड्स नामक लाइलाज बिमारी भी अफ्रीका देश से बाहर गया, क्योंकि इसका कारण है यहां बड़ें तौर पर सेक्स रैकट का गौरखधंधा आराम से चलाया जाता है और सरकार मानों आंखे बंद करके कुछ देखना चाहती ही नहीं है।

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