कोरोना के बढ़संसद सत्र की अवधि कम किए जाने की संभावना p

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कोरोना के बढ़ते आंकड़ों का असर अभी जारी संसद सत्र पर भी पड़ सकता है. संसद सत्र की अवधि कम किए जाने की संभावना है. आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में लोकसभा के बिजेनस एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई. बैठक में मौजूद सभी दलों के सदस्यों में इस बात को लेकर सहमति बनी कि कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र सदन की कार्यवाही को निर्धारित समय से पहले ख़त्म किया जाए. संसद के वर्तमान सत्र की अवधि 1 अक्टूबर तक तय की गई है.

कमेटी की बैठक में तय किया गया कि सरकार के ज़रूरी विधायी काम पूरे होने के बाद सदन की कार्यवाही ख़त्म होना चाहिए. सूत्रों के मुताबिक़ संसद का सत्र अपने नियत समय से एक हफ्ता पहले ख़त्म किए जाने की संभावना है. सरकार की प्राथमिकता सबसे पहले उन सभी 11 अध्यादेशों पर संसद की मंज़ूरी दिलवाना है जो कोरोना काल में जारी किए गए थे. इन अध्यादेशों में किसानों से जुड़े तीन अहम अध्यादेश भी हैं जिनपर देश के कई राज्यों में बवाल मचा है. कुल 11 अध्यादेशों में से 7 लोकसभा से जबकि 4 राज्यसभा से पारित हो चुके हैं.

विपक्षी दलों ने सरकार से कहा है कि 18 दिनों का सत्र जोखिम भरा हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, सरकार ने इस दिशा में विचार करना आरंभ कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक 53 लाख से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं जबकि 85 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं. लेकिन एक राहत की बात यह है कि देश में 24 घंटे में ही 95,880 लोग संक्रमणमुक्त हो गए हैं.

 

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