चूहों वाली अद्भूद करणी माता, यहां चूहों के जूठे प्रसाद को ग्रहण करते हैं भक्त!

-करिश्मा राय तंवर

 

किसी खाने की चीज को अगर चूहे छू लेते हैं तो हम उसे फेंक देते है, क्योंकि उसको खाने से बीमार होने की संभावना रहती है, लेकिन एक ऐसा मंदिर जहां चूहों का झूठा किया हुआ ही प्रसाद मिलता है. चूहों वाली माता का यह मंदिर राजस्थान के विशाल रेगिस्तान के बीच बीकानेर जिले के देशनोक में स्थित है. करणी माता के मंदिर में हजारों चूहें है, जिन्हें माता की संतान माना जाता है.

 

 

माता के इस मंदिर में लगभग 20 हजार चूहे हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इतने चूहे होने के बाद भी मंदिर में बिल्कुल भी बदबू नहीं है और आज तक कोई भी बीमारी नहीं फैली. यहां तक की चूहों का जूठा प्रसाद खाने से कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ. मंदिर अपने ऐसे ही कई गुणों और चमत्कारों के लिए लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

 

ये चूहे माने जाते हैं सुख-समृद्धि का प्रतीक

करणी माता को दुर्गा माता का रूप माना जाता है. यहाँ पर चूहों को कावा कहा जाता है और इन्हें यहां पर भोजन करवाया जाता है और इनकी सुरक्षा की जाती है. यहां पर इतने चूहे हैं कि यहाँ पर आने वाले श्रद्धालुओं को अपने पांव को घिसकर चलना पड़ता है. यहाँ यह माना जाता है कि किसी श्रद्धालु के पैर के नीचे आकर कोई चूहा मर जाता है तो अपशकुन होता है और अगर चूहा किसी श्रद्धालु के पैर के ऊपर से निकल जाए तो उस पर माँ की विशेष कृपा होगी.

 

 

यहां सफेद चूहा पूरी करता है मनोकामना!

देशनोक करण माता मंदिर के सफेद चूहों को लेकर श्रद्धालुओं में बड़ी आस्था है. श्रद्धालु मंदिर परिसर में सफेद चूहों के दर्शन को शुभ मानते है. यहां पर हज़ारों काले चूहों के बीच सफेद चूहे भी हैं. ऐसा माना जाता है यदि कोई श्रद्धालु सफेद चूहे को देख लेता है तो उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है.

देशनोक की करणी माता बीकानेर राजघराने की कुलदेवी हैं. बताया जाता है की यह मंदिर राजपूत राजाओं ने 15 वीं शताब्दी में बनाया था.

 

मंदिर का इतिहास

माँ दुर्गा ने यहाँ एक चारण जाति के परिवार में कन्या के रूप में जन्म लिया. और जोधपुर और बीकानेर पर शासन करने वाले राठौड़ राजाओं की आराध्य अपनी शक्तियों के कारण सब लोगों का भला करते हुए बनीं. मानना यह है की एक गाँव में जन्मी इस कन्या का असली नाम रिघुबाई था , पर लोग इनको माता के नाम से बुलाते थे और इनको पूजते थे.

 

 

मंदिर की पौराणिक कथा

करणी माता के सौतेले पुत्र की कुएँ में गिरने से मृत्यु होने पर उन्होंने यमराज से बेटे को जीवित करने की माँग की. यमराज ने करणी माता के आग्रह पर उनके पुत्र को जीवित तो कर दिया पर चूहे के रूप में, तब से ही यह माना जाता है कि करणी माता के वंशज मृत्युपर्यन्त चूहे बनकर जन्म लेते हैं और देशनोक के इस मंदिर में स्थान पाते हैं.

 

इस मंदिर में चूहों के अलावा संगमरमर के मुख्य द्वार पर की गई उत्कृष्ट कारीगरी, मुख्य द्वार पर लगे चांदी के बड़े-बड़े किवाड़, माता के सोने के छत्र और चूहों के प्रसाद के लिए रखी चांदी की बहुत बड़ी परात भी मुख्य आकर्षण है..इस मंदिर के चूहों की एक विशेषता और भी है कि मंदिर में सुबह ओर शाम होने वाली आरती के दौरान बड़ी संख्या में चूहें मंदिर परिसर में दिखाई देते हैं और श्रद्धालु मां करणी के साथ-साथ इन चूहों को भी बाकायदा दूध और लड्डू प्रसाद के रुप में चढ़ाते हैं.

 

 

चूहों के जूठे प्रसाद को ग्रहण करते हैं भक्त

इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां आने वाले सभी भक्तों को चूहे का जूठा प्रसाद खाने को मिलता है. और चौंकाने वाली बात यह है कि चूहों का जूठा प्रसाद खाने के बाद भी आज तक कोई व्यक्ति बीमार नहीं हुआ है. यहां न केवल करणी माता के भक्तों की कतारें लगती हैं बल्कि बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानियों का आना भी आम बात है.

 

 

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