महाराष्ट्र में एक शर्मशार करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक महिला डॉक्टर ने सीनियर द्वारा बार-बार की जा रही रैगिंग से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

मामला मुंबई के नायर अस्पताल का है जहां जातिसूचक तानों और सीनियर्स के टॉर्चर से तंग आकर एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। महिला की पहचान 23 वर्षीय पायल ताडवी का रुप में हई। पायल के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते पायल की शिकायत पर गौर किया होता तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।

पुलिस ने इस मामले में पायल की सीनियर डॉक्टर्स डॉ. हेमा आहुजा, डॉ भक्ती अहिरे और डॉ. अंकिता खंडेलवाल पर केस दर्ज कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, गायनेकोलॉजिस्ट सेकंड ईयर की रेजिडेंट डॉक्टर पायल की मां ने बताया कि, “अगर अस्पताल प्रशासन ने इस मामले पर थोड़ी संवेदनशीलता दिखाई होती तो आज मेरी बेटी जिंदा होती।” सुसाइड करने से कुछ घंटे पहले पायल ने अपनी मां अबेदा से कहा था कि वह अपनी तीनों सीनियर की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं कर पा रही है।

वहीं पायल के पिता ने कहा, “शुरू के छह महीने सही थे। सीनियर्स और जूनियर्स के बीच हल्की नोंकझोक चलती रहती है, लेकिन पायल ने कभी नहीं सोचा था कि उसे इतना प्रताड़ित किया जाएगा। 2018 में जब उसके साथ ये सब हुआ, तो उसने इस बारे में हमें बताया। इसके बाद हमने उसके पति डॉ सलमान से बात की और सलमान कहा कि ये सब होता रहता है और पायल को इसे नजरअंदाज करना चाहिए।”

रिपोर्ट के मुताबिक पायल ने यह सब नजरअंदाज करने की कोशिश की लेकिन सीनियर्स ने उसे प्रताड़ित करना बंद नहीं किया। आरोपित लड़किया अक्सर उसकी कास्ट और रिजर्व कोटे के जरिए मेडिकल में हुए उसके एडमिशन को लेकर उसे ताना मारती रहती थीं। पायल ने जब दोबारा इसकी शिकायत अपने परिजनों से की तो, उन्होंने अस्पताल प्रशासन से बात की। जिसके बाद आरोपित लड़कियों को चेतावनी दी गई और पायल को सलाह दी कि वह इस सब चीजों पर ध्यान देने के बजाए अपनी पढ़ाई पर फोकस करे। अस्पताल प्रशासन से शिकायत के बाद भी उन तीनों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।

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