चंडीगढ़, 30 मई (नवदीप छाबड़ा)- आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने कृषि क्षेत्र के ट्यूबवेलों को जारी मुफ्त बिजली सुविधा बंद करके एक नई स्कीम के अधीन बिल लागू करने के लिए पंजाब कैबिनेट की ओर से विचार-विमर्श की गई योजना का सख्त विरोध करते हुए इस फैसले को कृषि और किसान विरोधी कदम करार दिया, साथ ही चेतावनी दी कि यदि केंद्र की मोदी सरकार के दबाव में आ कर कैप्टन सरकार ने यह फैसला लागू करने की कोशिश की तो न केवल कांग्रेस बल्कि अकाली दल (बादल) और भाजपा इस अंनदाता विरोधी गुस्ताखी का अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।
भगवंत मान शुक्रवार को बिजली के इस ज्वलंत मुद्दे पर राजधानी में मीडिया के रूबरू हुए। इस मौके उनके साथ नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा, सीनियर नेता और विधायक प्रिंसीपल बुद्ध राम, अमन अरोड़ा, मीत हेयर, बीबी सरबजीत कौर माणूंके, प्रो. बलजिन्दर कौर, रुपिन्दर कौर रूबी, जै कृष्ण सिंह रोड़ी, मनजीत सिंह बिलासपुर, कुलवंत सिंह पंडोरी, कोर समिति के मैंबर गैरी बडि़ंग, सुखविन्दर सुखी और अन्य पार्टी नेता मौजूद थे।
भगवंत मान ने कहा, ‘‘किसानों का गला दबाने वाला यह कदम केंद्र सरकार से पंजाब की कर्ज लेने की समर्था सीमा को बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है। सही अर्थों में यह दोहरी तबाही है। राज्य के मौजूदा कुल घरेलू आमदनी (जीडीपी) मुताबिक अब पंजाब सरकार 18,000 करोड़ रुपए का कर्ज ले सकती है। यदि मोटरों पर डीबीबी योजना के अधीन बिल लागू कर दिए जाएंगे तो 30,000 करोड़ रुपए तक का कर्ज राज्य सरकार ले सकेगी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान केंद्र सरकार की शर्तों के समक्ष झुकते हुए पंजाब सरकार ने ‘पानी पर सैस की वसूली’ के बारे में हां कर दी है। जो किसानों के लिए बेहद खतरनाक साबित होगी।’’
भगवंत मान ने हैरानगी प्रकटाते हुए कहा, ‘‘पता नहीं क्यों कैप्टन अमरिन्दर सिंह मोदी सरकार के पंजाब विरोधी और लोक विरोधी फैसले इतनी आसानी से मान लेते हैं? जबकि चाहिए यह था कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सर्वदलीया बैठक बुलाई जाती। पंजाब विधान सभा का विशेष सत्र बुलाया जाता और सबकी सहमति के साथ केंद्र सरकार की घातक शर्तों का विरोध किया जाता।’’
भगवंत मान ने मोदी सरकार में हिस्सेदार बादल दल को भी आड़े हत्थों लेते कहा की, ‘‘ सुखबीर सिंह बादल किस नैतिक अधिकार के साथ पंजाब कैबिनेट की मोटरों पर बिल के बारे में हां करने का विरोध कर रहे हैं? जबकि यह केंद्रीय कैबिनेट (मोदी सरकार) का ही फैसला है, जिस में बीबी हरसिमरत कौर बादल बैठती हैं। यदि बादलों को पंजाब और किसानों की सचमुच फिक्र होती तो हरसिमरत कौर बादल अपनी कुर्सी की प्रवाह किए बिना उसी वक्त इस किसान विरोधी योजना का विरोध करते, परन्तु कुर्सी की खातिर ऐसा करने की कभी भी हिम्मत नहीं पड़ी। इस लिए इस मुद्दे पर बादल और कैप्टन एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।’’
भगवंत मान ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल की वायदा-खिलाफियों के कारण आज कोई भी कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार पर रत्ती भर भी ऐतबार नहीं करता। किसानों को पता है कि जैसे पहले पूरा कर्ज माफी, घर-घर नौकरी जैसे वायदों पर कैप्टन ने धोखा दिया उसी तरह आज मोटरों पर मीटर लगा कर बिल तो वसूले जाएंगे परन्तु वह डीबीबी के अंतर्गत वापिस मोड़े जाएंगे इस पर किसी को यकीन नहीं है। दूसरा बिल की वापसी मोटर मालिक को जाएगी, ठेके और हिस्सेदारी वाली मोटरों के बिल नए विवाद छेडऩगे। इस लिए वह (मान) इस तजवीज़ को रद्द करते हुए मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह, सुखबीर सिंह बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, हरदीप सिंह पुरी और सोम प्रकाश समेत पंजाब के संसद सदस्यों से अपील करता हूं कि केंद्र की घातक शर्तों के समक्ष झुकने की बजाए एकजुट हो पंजाब के लिए बिना शर्त आर्थिक पैकेज का दबाव बनाऐं।
इस मौके मान ने बिजली संशोधन बिल-2020 थर्मल प्लांटों को लगे जुर्मानों को बिजली उपभोक्ताओं से वसूलना, पंजाब कैबिनेट की माफी से शराब माफिया को सीधे संरक्षण देने और हिस्सेदारी निर्धारित करने समेत मैडीकल कालेजों की फीसों में वृद्धि का विरोध किया और बीज घोटाले को लेकर कैप्टन और बादलें को घेरा।
इस मौके अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार की ओर से थोपे जा रहे बिजली संशोधन बिल-2020 को पंजाब और पंजाबियों के हकों पर सीधा डाका करार दिया। यदि यह बिल पास हो गया तो पंजाब में ट्रांसपोर्ट माफिया की तरह सभी मलाईदार बिजली सर्कल अम्बानी-अंडानियों के निजी हाथों में चले जाएंगे। किसानों-दलितों को मिल रही बिजली सब्सिडियों पर भी गाज गिरेगी। इस लिए केरल और अन्य राज्यों की तरह पंजाब को भी इस घातक बिल का विरोध करना चाहिए। अमन अरोड़ा ने इस 2020 बिल को राज्यों के अधिकारों पर केंद्र का सीधा डाका करार दिया।