नागदेव की सबसे अद्भुत प्रतिमा, केवल एक दिन खुलता है ये मंदिर!

-करिश्मा राय तंवर

 

हिंदू धर्म में नाग देवता को माना जाता है. उनकी पूजा की जाती है. नाग पंचमी के दिन खासतौर पर नाग को दूध पिलाया जाता है. नागों की पूजा करने की परंपरा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है. लेकिन मध्यप्रदेश में नागदेव का एक ऐसा मंदिर स्थित है जो केवल नागपंचमी के दिन ही खुलता है.

 

 

 

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर का मंदिर मौजूद है. जो केवल नाग पंचमी के दिन खुलता है. उसी दिन इस मंदिर में भक्तों को नागदेवता के दर्शन हो पाते हैं. मान्यताओं के अनुसार इस दिन नागराज खुद मंदिर में मौजूद रहते हैं.

 

 

 

कहा जाता है कि जो प्रतिमा यहां है वो दुनिया में कहीं और नहीं है. इस प्रतिमा को नेपाल से लाया गया है. इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर की ये प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है. पूरी दुनिया में यही एक ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं. मंदिर में जो प्राचीन मूर्ति स्थापित है उस पर शिवजी, गणेशजी और मां पार्वती के साथ दशमुखी सर्प शय्या पर विराजित हैं.

 

मंदिर से जुड़ी मान्यताएं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भोलेनाथ को मनाने के लिए सर्पराज तक्षक ने घोर तपस्या की थी. तपस्या से भोलेनाथ खुश हुए और फिर उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को वरदान के रूप में अमर होने का वरदान दिया. कहा जाता है कि उसके बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया.

 

1050 ईस्वी में बना था मंदिर

परमार राजा भोज ने 1050 ईस्वी के आस-पास इस मंदिर को बनवाया था. 1732 में सिं‍धिया घराने के महाराज राणोजी सिंधिया ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया. उसी वक़्त इस मंदिर का भी जीर्णोद्धार हो गया.

 

 

 

मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में दर्शन कर लिए वो सर्पदोष से मुक्त हो जाता है. इसे देखते हुए जब नागपंचमी के दिन ये मंदिर खुलता है तो मंदिर के बाहर भक्तों की काफी भीड़ होती है. इस मंदिर में श्रद्धालु इसी उम्मीद से आते हैं कि उन्हें नागराज के साथ-साथ महादेव का आशीर्वाद भी मिल जाएगा. नागपंचमी पर इस मंदिर में लाखों लोग दर्शन करने के लिए आते हैं.

 

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