शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल के एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। इस घाटोले में कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का हाथ होने का आरोप है।पश्चिम बंगाल की चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप ने आम लोगों के ठगने के लिए कई लुभावन ऑफर दिए थे। इस कंपनी की ओर से 34 गुना मुनाफा करने का वादा किया गया था और लोगों से पैसे ठग लिये गये थे। इस घोटाले में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का हेर-फेर हुआ है। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को जांच का आदेश दिया था। SC ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को आदेश दिया था कि वे सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करें। लेकिन कल रात CBI के अधिकारी को हि गिरफ्तार कर लिया गया था फिर कुछ देर बाद ही छोङ दिया गया था। इस कंपनी की स्थापना जुलाई 2008 में की गई और देखते ही देखते ये कंपनी हजारों करोड़ की मालिक बन गई थी। शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई जांच के घेरे में हैं। राजीव कुमार ने ही चिटफंड घोटालों की जांच करने वाली एसआईटी टीम की अगुवाई की थी। इस कमेटी का गठन साल 2013 में किया गया था। कहा जा रहा है कि घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइल और दस्तावेज गायब हैं। वहीं सीबीआई गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करना चाहती है। हाल ही में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से चिदंबरम की पत्नी को 1.4 करोड़ रुपये मिले थे।

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