भारत में कई मंदिर मौजूद है और हर मंदिर से जुड़ी अलग मान्यता है। मंदिर की सीढ़ियो पर चढ़कर आपने भगवान के दर्शन तो जरुर किए होंगे लेकिन क्या आपने कभी मंदिर की सीढ़ियों से संगीत को सुना है। अगर नहीं तो आप दक्षिण भारत के ऐरातेश्वर मंदिर जरुर जाइए क्योंकि इस मंदिर की हर सीढ़ी पर जब आप चढ़ेगे तो आपको एक अलग ध्वनि सुनाई देगी।

ऐरातेश्वर मंदिर, फोटो: इंटरनेट

ऐरावतेश्‍वर मंदिर तमिलनाडु में स्‍थित है। इसे 12वीं सदी में चोल राजाओं ने बनवाया था। यह मंदिर महान जीवंत चोल मंदिरों के रूप में जाना जाता है। साथ ही इसे यूनेस्‍को की ओर से वैश्विक धरोहर स्‍थल भी घोषित किया गया है। मंदिर की खास बात है यहां की तीन सीढ़ियां, जिन्‍हें इस प्रकार बनाया गया है कि इनपर जरा सा भी तेज पैर रखने पर संगीत की अलग-अलग ध्‍वनि सुनाई देने लगती है। मंदिर के आंगन के दक्षिण पश्चिमी कोने में 4 तीर्थ वाला एक मंडप है,जिनमें से एक पर यम की छवि बनी है।

ऐरातेश्वर मंदिर, फोटो: इंटरनेट

ऐरावतेश्‍वर मंदिर भोलेनाथ को समर्पित है। मान्यता के अनुसार यहां देवताओं के राजा इंद्र के सफेद हाथी ऐरावत ने शिव जी की पूजा की थी। ऋषि दुर्वासा द्वारा इंद्र का यह हाथी श्रापित था, श्राप के कारण हाथी का रंग बदल गया था। अपना रंग वापस पाने के लिए उसने इसी स्थान पर शिव जी की पूजा की थी। इस वजह से इस मंदिर का नाम ऐरावतेश्‍वर मंदिर हो गया।

ऐरातेश्वर मंदिर, फोटो: इंटरनेट

आस्था के साथ मनोरंजन को ध्यान में रखकर इस मंदिर का निर्माण किया गया था। मंदिर के दक्षिणी भाग को पत्थर के एक विशाल रथ का रूप दिया गया है, जब आप इसे देखेंगे तो आपको लगेगा कि इस पत्थरनुमा रथ को घोड़े खींच रहे हैं। दक्षिण भारत में मौजूद ये मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का उत्तम नमूना है और इसलिए विदेशी सैलानी भी इस मंदिर के दर्शन करने जरुर आते है।

ऐरातेश्वर मंदिर, फोटो: इंटरनेट

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