विघ्नहर्ता गणपति  का चमत्कारी धाम,मंदिर में उलटा स्वास्तिक बनाने की परंपरा!

-करिश्मा राय तंवर

 

विघ्नहर्ता गणपति भक्तों के हर दुख का हर कर उनका जीवन सुखमई बना देते है। गणपति के मंदिर तो कई राज्यों में मौजूद है, लेकिन लंबोदर का सबसे चमत्कारी धाम मध्यप्रदेश के इंदौर में स्थित है। इंदौर में स्थित खजराना गणेश मंदिर के चमत्कार भक्तों में काफी लोकप्रिय हैं।

 

खजराना गणेश से जुड़़ी मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा की पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं और भगवान गणेशजी को मोदक का भोग लगाया जाता है।

 

खजराना मंदिर का निर्माण

इस मंदिर का निर्माण रानी अहिल्याइ बाई होल्कर ने करवाया गया था। यह मंदिर हिंदूओं के देवता भगवान गणेश को समर्पित है। इस मंदिर में स्थित प्राचीन प्रतिमा के बारे में कहते हैं यह प्रतिमा एक स्थानीय पंडित मंगल भट्ट को सपने में दिखी थी। इसी सपने के बाद रानी अहिल्या बाई होल्कर ने खुदाई कर जमीन के नीचे से मूर्ति निकलवाई और स्थापित करवाया। जहां से प्रतिमा निकाली गई थी वहां एक जलकुंड है, जो मंदिर के ठीक सामने है।

 

इस मंदिर की मान्यता है कि यहां जब भी कोई दिल से मनोकामना की जाती है वह पूरी जरूरी होती है, लेकिन इसे पूरी करने के लिए कुछ अलग तरीके से कोशिश करनी होती है.. ये पहला मंदिर हैं जहां मनोकामना पूरी करने के लिए लोग हिंदू शास्त्र के विपरीत काम करते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तब मंदिर में आ कर अपनी इस गलती का सुधार करते हैं. दरअसल

 

मंदिर से जुड़ी मान्यता

खजराना मंदिर में जो भी भक्त अपनी मनोकामना ले कर आता है वह गणेश जी के पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाता है। जब उनकी मनोकामना गणपति जी पूर्ण कर देते हैं तो भक्त मंदिर में आकर भगवान के पीठ पर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं

 

जराना गणेश मंदिर परिसर में 33 छोटे-बड़े मंदिर बने हुए हैं। यहां भगवान राम, शिव, मां दुर्गा, साईं बाबा, हनुमानजी सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं। मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ भी है। इस पीपल के पेड़ के बारे में मान्यता है कि यह मनोकामना पूर्ण करने वाला पेड़ है।

 

हर साल बढ़  जाती है भगवान की मूर्ति

  • 1735 में जब खजराना गणेश की मूर्ति की स्थापना हुई थी, तब यह ढाई फीट लंबी और सवा दो फीट चौड़ी थी। इसके साथ रिद्धी और सिद्धी की प्रतिमा भी थी।
  • अब भगवान गणेश की प्रतिमा करीब साढ़े चार फीट ऊंची और 5 फीट चौड़ी हो गई है।
  • भगवान के साथ लगी रिद्धी और सिद्धी की मूल प्रतिमा भी भगवान की प्रतिमा में ही समा गई है।
  • इस कारण कुछ समय पहले मंदिर में नए सिरे से इनकी मूर्तियां लगवाई गईं।
  • मंदिर के पुजारी के मुताबिक़ हर साल भगवान की मूर्ति करीब एक सेंटीमीटर बढ़ जाती है।
  • पिछले 284 वर्षों में इसका आकार बढ़कर दोगुना हो गया है।
  • मूर्ति पर रोज सवा किलो घी में आधा किलो सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाया जाता है। सिंदूर चढ़ाने की परंपरा 284 सालों से चली आ रही है।
  • मंदिर में रोज सुबह सवा किलो घी में आधा किलो सिन्दूर मिलाकर चोला चढ़ाया जाता है। यानी हर साल करीब 182 किलो सिंदूर और 456 किलो घी मूर्ति पर लग जाता है।

 

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में कुछ भी मांगने से भक्त की मन्नत जरुर पूरी हो जाती है। इसी कारण, इस मंदिर में भगवान का आशीर्वाद लेने हजारों भक्त गण आते है और मंदिर की यात्रा करते है।

 

शुभ कार्य से पहले गणपति को निमंत्रण

भगवान श्रीगणेश के घर में हर शुभ कार्य का पहला निमंत्रण दिया जाता है इसलिए इंदौर और इसके आसपास रहने वाले लोग किसी भी शुभ काम से पहले सबसे पहला निमंत्रण गणपति को करते है. वहीं नया वाहन, जमीन या मकान खरीदने पर भक्त भगवान गणेश के दरबार में माथा टेककर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं.

 

इसके अलावा देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम भी सबसे आगे लिया जाता है। यहां भक्तों की ओर से चढ़ावे के कारण मंदिर की कुल चल और अचल संपत्ति बेहिसाब है।

 

इंदौर के खजराना मंदिर में वैसे तो रोज पूजा और आरती होती है, लेकिन बुधवार का दिन यहां के लिए खास होता है। उस दिन यहां विशेष पूजा और आरती आयोजित की जाती है। इसमें शामिल होने बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

 

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