भारत के पड़ोसी देश में स्थित शिव का प्रसिद्ध मंदिर, केदारनाथ से है इस मंदिर का संबंध

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-नीलम रावत, संवाददाता

भारत समेत विश्वभर में हिन्दू देवी-देवताओं के कई मंदिर और तीर्थ स्थान मौजूद है. भगवान शिव कहीं नीलकंठ रुप में विराजमान है तो कहीं वे महाकाल रूप में मौजूद है. उत्तराखंड में केदारनाथ में भगवान शिव मौजूद है तो वहीं केदारनाथ में मौजूद शिव-शंकर का आधा हिस्सा नेपाल में स्थित है. जी हां नेपाल में स्थित है भोलेनाथ का पशुपतिनाथ मंदिर, जिसे उत्तराखंड में विराजमान केदारनाथ का आधा हिस्सा माना जाता है.

UNESCO की लिस्ट में शामिल पशुपतिनाथ

पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू से देवपाटन गांव में बागमती नदी के तट पर स्थित है. यह मंदिर हिन्दू धर्म के आठ सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. ये मंदिर दुनिया भर के हिन्दू तीर्थ यात्रियों के अलावा गैर-हिन्दू पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी रहा है. इतना ही नहीं पशुपतिनाथ मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में भी शामिल है.

पशुपतिनाथ मंदिर का अर्थ भी है. पशु अर्थात प्राणी और पति का अर्थ है स्वामी और नाथ का अर्थ है मालिक या भगवान. इसका मतलब यह कि संसार के समस्त जीवों के स्वामी या भगवान हैं पशुपतिनाथ.

केदारनाथ और पशुपतिनाथ का संबंध

पौराणिक कथा के अनुसार जब महाभारत के युद्ध में पांडवों ने अपने ही रिश्तेदारों का रक्त बहाया तब भगवान शिव उनसे बेहद क्रोधित हो गए थे. श्रीकृष्ण के कहने पर पांडव भगवान शिव से मांफी मांगने के लिए निकल पड़े, गुप्त काशी में पांडवों को देखकर भगवान शिव वहां से विलुप्त होकर एक हिमालय में चले गए.

शिव का पीछा करते हुए पांडव केदारनाथ भी पहुंच गए लेकिन भगवान शिव उनके आने से पहले ही भैंस का रूप लेकर वहां खड़े भैंसों के झुंड में शामिल हो गए. पांडवों ने महादेव को पहचान तो लिया लेकिन भगवान शिव भैंस के ही रूप में भूमि में समाने लगे.

इसपर भीम ने अपनी ताकत के बल पर भैंस रूपी महादेव को गर्दन से पकड़कर धरती में समाने से रोक दिया, जिसके बाद भगवान शिव को अपने असल रूप में आना पड़ा और फिर उन्होंने पांडवों को क्षमादान दे दिया.

लेकिन भगवान शिव का मुख तो बाहर था लेकिन उनका देह केदारनाथ पहुंच गया था, जहां उनका देह पहुंचा वह स्थान आज केदारनाथ और उनके मुख वाले स्थान को पशुपतिनाथ के नाम से जाना जाता है.

यूं तो महादेव के 12 ज्योर्तिलिंग है लेकिन पशुपतिनाथ और केदारनाथ के दर्शन करने के बाद ही ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने का पुण्य प्राप्त होता है. पशुपतिनाथ में भैंस के सिर और केदारनाथ में भैंस की पीठ के रूप में शिवलिंग की पूजा होती है. पशुपतिनाथ मंदिर के बाहर एक घाट स्थित है जिसे आर्य घाट के नाम से जाना जाता है. पौराणिक काल से ही केवल इसी घाट के पानी को मंदिर के भीतर ले जाए जाने का प्रावधान है.

पशुपतिनाथ मंदिर की खासियत

 

  •  पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में पंचमुखी शिवलिंग का विग्रह है
  • प्रत्येक मुख के दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमल मौजूद है
  • पूर्व दिशा की ओर वाले मुख को तत्पुरुष और पश्चिम की ओर वाले मुख को सद्ज्योत कहते हैं
  • उत्तर दिशा की ओर वाले मुख को अर्धनारीश्वर और दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोरा कहते हैं
  • जो मुख ऊपर की ओर है उसे ईशान मुख कहा जाता है

  • पशुपतिनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग पारस पत्थर के समान है, जो लोहे को भी सोना बना सकता है
  • मंदिर का शिखर स्वर्णवर्णी छटा बिखेरता है, इसके साथ ही डमरू और त्रिशूल भी प्रमुख आकर्षण है
  • मंदिर एक मीटर ऊंचे चबूतरे पर स्थापित है, मंदिर के चारों ओर पशुपतिनाथ जी के सामने चार दरवाज़े हैं
  • दक्षिणी द्वार पर तांबे की परत पर स्वर्ण जल चढ़ाया हुआ है, बाकी तीन पर चांदी की परत है

पशुपतिनाथ मंदिर में यदि आप अंदर जाना चाहते हैं तो इसकी कुछ अहम मर्यादाएं हैं, जिनका पालन करना बेहद जरुरी है. केवल हिन्दू और बौद्ध मूल के लोग ही इस मंदिर के भीतर जाकर प्रार्थना कर सकते हैं. इसके अलावा विदेशी या फिर अन्य गैर-हिन्दू धर्म के लोग केवल नदी के दूसरे छोर से मंदिर के दर्शन कर सकते हैं.

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