श्रीकृष्ण के पोते ने करवाया था इस मंदिर का निर्माण,भगवान विष्णु के चार धामों में शामिल मंदिर

Spread the love

-नीलम रावत, संवाददाता

श्रीकृष्ण रुप में भगवान विष्णु ने आठवा अवतार लेकर धरती को पापियों से मुक्त करवाया था. श्रीकृष्ण का जन्म यूं तो मथुरा में हुआ लेकिन उन्होंने द्धारका को अपना निवास स्थान बनाया और इसी कारण श्रीकृष्ण को द्वारकाधीश भी कहा जाता है.

गुजरात के अहमदाबाद से लगभग 380 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है द्वारका. वही द्वारका जो हिंदुओं की आस्था के प्रसिद्ध केंद्र चार धामों में से एक है, वही द्वारका जिसे द्वारकापुरी कहा जाता है और सप्तपुरियों में शामिल किया जाता है. मथुरा छोड़ने के बाद श्रीकृष्ण ने अपने हाथों से इसी पावन द्वारका नगरी को बसाया था.

दुनियाभर की आस्था का केंद्र

द्वारका आज भी कृष्ण भक्तों सहित हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के लिये एक महान तीर्थ है. हजारों लोग श्रीकृष्ण के द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन करने आते हैं. मान्यता है कि लगभग 5 हजार साल पहले जब भगवान श्री कृष्ण ने द्वारका नगरी को बसाया था तो उसमें जिस स्थान पर उनका निजी महल यानि हरि गृह था, वहीं पर द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण हुआ. मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के अपने धाम जाने के बाद ही उनके साथ ही उनकी बसाई गई द्वारका नगरी भी समुद्र में समा गई थी.

श्रीकृष्ण के पोते ने करवाया निर्माण

लगभग 2 हजार साल पहले श्रीकृष्ण के पोत्र वज्रनाभ ने द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण करवाया था. आदि शंकराचार्य ने इस स्थान को भगवान विष्णु के चार धामों में शामिल किया था. मंदिर को वर्तमान स्वरुप 16वीं शताब्दी के आसपास प्राप्त हुआ था.

द्वारकाधीश मंदिर की महिमा

  • मंदिर की चारों दिशाओं में चार द्वार हैं
  • जिनमें उत्तर और दक्षिण में स्थित मोक्ष और स्वर्ग द्वार है
  • मंदिर सात मंजिला है जिसके शिखर की ऊंचाई 235 मीटर है
  • यह मंदिर 72 स्तंभों पर स्थापित है
  • मंदिर के शिखर पर ध्वजा को देखकर दूर से ही श्री कृष्ण के भक्त शीष झुका लेते हैं
  • यह ध्वज लगभग 84 फुट लंबा हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के रंग श्रद्धालुओं को मोह लेते हैं
  • मंदिर के ऊपर स्थित ध्वज सूर्य और चंद्रमा को दर्शाता है
  • जिसका मतलब है कि पृथ्वी पर सूर्य और चंद्रमा मौजूद होने तक कृष्ण होंगे
  • मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री कृष्ण की श्यामवर्णी चतुर्भुजी प्रतिमा है
  • श्रीकृष्ण की प्रतिमा चांदी के सिंहासन पर विराजमान है
  • ये अपने हाथों में शंख, चक्र, गदा और कमल धारण किये हुए हैं
  • यहां श्रीकृष्ण को रणछोड़ कहा जाता है

वास्तु कला के नजरिये से भी द्वारकाधीश मंदिर को बहुत ही उत्कृष्ट माना जाता है. मंदिर का निर्माण चूना पत्थर से हुआ है जो अब भी प्राचीन स्थिति में मौजूद है. हजारों श्रद्धालु भगवान विष्णु के आठवें स्वरुप श्रीकृष्ण के दर्शन करने इस धाम में आते हैं और उनका आशीर्वाद लेकर जाते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *