हरियाणा, पंजाब और यूपी में प्रदूषण नियंत्रण मानको का उल्लंघन किया जा रहा है-AAP

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प्रणय शर्मा, संवाददाता

 

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सीपीसीबी, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नहीं है, बल्कि वह अब ‘केंद्रीय राजनीतिक नियंत्रण बोर्ड’ हो गया है।

 

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और विधायक सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली में होने वाले प्रदूषण को लेकर गुरुवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि अक्तूबर का महीना है और ऐसी खबरें आ रही हैं कि दिल्ली के करीबी राज्यों (पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश) के किसान बिना राज्य और केंद्र सरकार की मदद के चलते बड़े स्तर पर पराली जला रहे हैं।

 

हरियाणा, पंजाब और यूपी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है, लेकिन सीपीसीबी चुप है। पड़ोसी राज्यों के किसान राज्य और केंद्र से मदद नहीं मिलने के कारण पराली जलाने के लिए मजबूर हैं और अगले दो-तीन दिनों में पराली का धुंआ दिल्ली पहुंचने की संभावना है, जिससे प्रदूषण बढ़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद कोयला आधारित थर्मल पाॅवर प्लांट्स में अभी तक प्रदूषण कम करने वाले उपकरण नहीं लगाए गए हैं, जबकि कई बार अंतिम तिथि बढ़ाई जा चुकी है।

 

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रदूषण पर रोक लगाने वाला केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) अब केंद्रीय राजनीतिक नियंत्रण बोर्ड हो गया है। अब इस संस्था को शुद्ध राजनीति करते हुए देखा जा सकता है।

 

पूरे देश में दिल्ली ऐसा राज्य है जहां की सरकार ने अपने यहां मौजूद कोयले के प्लांटों को हमेशा के लिए बंद कर दिया है। हालांकि, पूरे देश में इस तरह के प्लांट अभी भी चल रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि क्या सीपीसीबी को यह प्लांट नजर नहीं आ रहे हैं, क्या उनको पंजाब, हरियाणा और यूपी की सरकारें दिखनी बंद हो गईं, क्या यह राज्य अब इस देश में नहीं रहे? इनके ऊपर सीपीसीबी इतनी खामोश क्यों है? जब दिल्ली सरकार ने अपने यहां मौजूद पावर प्लांटों को बंद कर दिया, तो इन राज्यों ने अभी तक इन्हें बंद क्यों नहीं किया है?

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