“एमाजॉन” पर इस कानून का उल्लंघन करने पर हो सकती है कार्रवाई

Amazon

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

एमाजॉन (Amazon) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले प्राइम वीडियो तांडव की वजह से एमाजॉन पर काफी हंगामा हुआ। अब एक नई मुसीबत एमाजॉन पर मंडरा रही है। केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के लीगल मेट्रोलॉजी निदेशक ने मेट्रोलॉजी विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिसों के खिलाफ एमेजॉन की एक अपील को ठुकरा दिया है और कहा है कि विभाग एमेजॉन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

 

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इस मामले का उल्लंघन करते हुए पाया गया

 

लीगल मेट्रोलॉजी विभाग ने लीगल मेट्रोलॉजी नियम, 2011, 6 (1) का उल्लंघन करते एमाजॉन (Amazon) को पाया है, जिसके तहत चिन्हित आवश्यक घोषणा का उल्लेख ई-कॉमर्स के साइट पर करना अनिवार्य है। एमेजॉन के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कहीं भी निर्माता का पूरा नाम पता प्रदर्शित नहीं किया गया था, जिसका उपयोग ई-कॉमर्स लेनदेन के लिए किया जाता रहा है। नियम के उल्लंघन के चलते एमाजॉन को विभाग ने 19 नवंबर को एक नोटिस जारी किया, और फिर से 9 दिसंबर को रिमाइंडर नोटिस जारी किया।

 

कैट ने दी यह जानकारी

 

 

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा, “एमाजॉन (Amazon) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी बिक्री उनके द्वारा ही नियंत्रित की जाती है और क्योंकि विक्रेताओं और सभी के विवरण का कोई उल्लेख नहीं होता है, बिक्री पहले सीधे एमाजॉन पर ही की जाती है और वे तय करते हैं कि किसको बिक्री का ऑर्डर भेजा जाना है। उन्होंने कहा, “इस तथ्य के आधार पर, लगभग 80 प्रतिशत बिक्री उनके पसंदीदा विक्रेताओं के माध्यम से हो रही है और इसलिए एमाजॉन का ये तर्क है कि विक्रेता अपने विवरणों को स्वयं सूचीबद्ध करते हैं बिल्कुल बेबुनियाद है।

 

कैट ने कहा, कम सजा सुनाना कानून का मजाक उड़ाने के बराबर है

 

 

भरतिया और खंडेलवाल ने कहा, “हालांकि यह (Amazon) आदेश खात्मे की कगार पर पहुंचे देश के खुदरा क्षेत्र को बहुत बल देता है, लेकिन भारतीय कानून का उल्लंघन करने के लिए विदेशी ई-कॉमर्स दिग्गज पर कम राशि की सजा सुनाना हमारे न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र का मजाक उड़ाने के अलावा और कुछ नहीं है। सजा हमारी अर्थव्यवस्था पर उनके द्वारा की गई क्षति के बराबर होनी चाहिए और इसमें विदेशी ई-कॉमर्स कम्पनियों को स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि राष्ट्र के कानून की अवहेलना करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा।”

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