INDIA-CHINA DISPUTE :40 साल बाद चल गई LAC पर गोली, जानिए कब-क्या और कैसे हुआ और इसके माइने क्या हैं

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रवि श्रीवास्तव

तो क्या अब तक भारत-चीन के बीच हुई हर वार्ता बेनतीजा रही ? क्या चीन संग युद्ध के शिवा कोई दूसरा उपाय नहीं है ? LAC पर गोली चलना क्या कोई मामूली बात है ? सवाल बड़े हैं  4 दशकों पर LAC पर गोली चलना भी बहुत बड़ी बात है

बोली और गोली दोनों के साथ नहीं चल सकती ये बात चीन को समझ नहीं आ रही है, बातचीत की मेज पर सहमति ना बन पाने के कारण बौखलाई चीनी सेना ने सरहद पर गोलीबारी को अंजाम दिया है, LAC पर गोली चलने की ये घटना करीब 40 साल बाद सामने आई है, एक एग्रीमेंट के तहत दोनों ही देश LAC पर गोलीबारी से परहेज करते थे, लेकिन चीन की हिमाकत ने उस करार को भी तोड़ दिया। कुल मिलाकर सरहद पर तनाव किस चरम पर है इसका अंदाजा ऐसे लगाइए कि अब दोनों देश के सैनिकों के बीच मामूल झड़पों से बढ़कर बात गोलीबारी पर पहुंच गई। और दुनिया जानता है इसका एकमात्र कारण चीनी लालची खोपड़ी और उसकी विस्तारवादी नीति है

कैसे और क्या हुआ ?
सूत्रों के मुताबिक, पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर एक बार चीनी सैनिक अपनी दबंगई दिखाने की फिराक में थे। हर बार की तरह इस बार भी जिंपिंग की पीएलए पिटने के मूड में थी। लेकिन क्योंकि वैश्विक स्तर पर बातचीत हो रही है। ऐसे में भारतीय सेना ने संयम का परिचय दिया। खबर है कि भारतीय सैनिकों ने चेतावनी दी, लेकिन रुकने के बजाय उन्होंने फायरिंग कर दी। इस पर भारतीय सैनिकों ने भी जवाबी फायरिंग की। वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लगभग चार दशक बाद पहली बार गोली चली है।

जिंपिंग की भोपू मीडिया का आरोप
एक तरफ तो विस्तारवादी नीति से जमीन हड़पने की कोशिश में जिंपिंग की पीएलए दिन रात गिद्द की नजरें लेकर भारत जमींन पर टकटकी लगाए बैठी है। दूसरी तरफ चीन का सरकारी अखबार ग्लोबल टाइ्म्स प्रौपेगैंडा फैलाने में पीछे नहीं है..इस मामले में भी झूठ फैलाने में ग्लोबल टाइम्स ने तनिक भी देर ना की । ग्लोबल टाइम्स ने इस घटना को लेकर लिखा कि -‘भारतीय जवानों ने बातचीत की कोशिश कर रहे पीएलए के बॉर्डर पट्रोल से जुड़े सैनिकों पर वार्निंग शॉट फायर किए जिसके बाद चीनी सैनिकों को हालात काबू में करने के लिए कदम उठाने पड़े।”भारतीय सेना ने पैंगोंग सो झील के दक्षिणी छोर के पास शेनपाओ की पहाड़ी पर एलएसी को पार किया।

चीन की ये कोई पहली हिमाकत नहीं
हाल ही में 29 अगस्त को नापाक मंसूबों के साथ भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे चीन को भारत के शूरवीरों ने सबक सिखाया था…उस वक्त भी झड़प हुई थी, इसके आलावा 15 जून को दोनों देशों के बीच तनाव तब बढ़ गया था जब भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गलवां घाटी में हिंसक झड़प हुई और भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। चीन की ओर से झड़प में हताहतों की जानकारी नहीं दी गई लेकिन अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चीन के 35 सैनिक मारे गए थे।

घटना की टाइमिंग महत्वपूर्ण
भारत-चीन विवाद पर हुई दोनों देशों के रक्षा मंत्री के बीच बैठक बेनतीजा रही ये घटना उसकी बानगी है। चीन की मांग हुई बैठक में कोई निर्याणक फैसला नहीं हो पाया ये भी इस गोलीबारी की घटना के बाद साफ हो गया..लेकिन मौजूदा वक्त में ये घटना तब हुई है।जब इसी मुद्दे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच मॉस्को के बैठक होने की संभावना भी जताई जी रही है।विदेश मंत्रियों के बीच बैठक से पहले चीन की हिमाकत ये समझा रही है कि बोली के जरिए दुनिया में अपनी छवि को पाक साफ बताने वाले जिंपिंग दोहरा रवैया अपना रहे हैं..ऐसा ना होता तो जिंपिंग की फौज सरहद पर यूं बेकाबू ना होती

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