इलहाबाद हाई कोर्ट का फैसला “आरोपी की गिरफ्तारी हो आखिरी विकल्प”

Allahabad HighCourt

 

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

पहले छोटे-छोटे मामलों में जहाँ गिरफ्तारी हो जाती थी। जिसको लेकर अधिकारों के हनन का बात कई बार सरकारों के सामने उठाई जाती रही है। कोशिश यही होती है मानव अधिकार का मसला कहीं भी दिक्कत पैदा न करे। इस मामले पर (Allahabad HighCourt) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज हुआ हो, उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए ‘एक अंतिम विकल्प’ होना चाहिए।

 

 

जहाँ बेहद जरुरी हो वहीं हो गिरफ्तारी

 

 

जिन मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी बेहद जरूरी है, या उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है, उन मामलों में गिरफ्तारी होनी चाहिए। (Allahabad HighCourt) कोर्ट ने कहा कि तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ्तारियां मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं। बुधवार को एक मामले में जस्टिस सिद्धार्थ ने सचिन सैनी नाम के व्यक्ति को शर्तों के साथ जमानत दी और कहा कि अदालतों ने बार-बार कहा है कि पुलिस के लिए गिरफ्तारी एक अंतिम विकल्प होना चाहिए। इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत में पुलिस द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी पुलिस में भ्रष्टाचार के मुख्य स्रोतों में से एक है।

 

 

 

यह था पूरा मामला

 

 

सैनी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता भारतीय दंड सहिता के तहत एफआईआर दर्ज की गई थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला दर्ज करने के बाद पुलिस अपनी इच्छा से आरोपी की गिरफ्तारी कर सकती है। अपने आदेश में कोर्ट ने जोगिंदर कुमार के मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग की तीसरी रिपोर्ट का हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि भारत में पुलिस द्वारा की जाने वाली गिरफ्तारी पुलिस में भ्रष्टाचार के मुख्य स्रोतों में से एक है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस द्वारा की जाने वाली करीब 60 प्रतिशत गिरफ्तारियां या तो गैर-जरूरी या अनुचित होती हैं। कोर्ट के अनुसार किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी खास मामले की परिस्थितियों के मुताबिक ही होनी चाहिए।

 

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