आज मनाई जा रही है अनंत चतुर्दशी, जानिए क्यों मनाते हैं अनंत चतुर्दशी

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-नीलम रावत, संवाददाता

देशभर में आज अनंत चतुर्दशी मनाई जा रही है. इस दिन सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु के अवतारों का पूजन किया जाता है. मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को अनेकों गुना ज्यादा शुभ फलों की प्राप्ति होती है.

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है. इस दिन मोक्ष की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. इस दिन 10 दिनों तक मनाए जाने वाले गणेश उत्सव का भी समापन होता है. माना जाता है कि महाभारत काल में इस व्रत की शुरुआत हुई थी. जब पांडवों का राज्य छीन लिया गया था तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ये व्रत करने की सलाह दी थी.

अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पौराणिक कहानी

अनंत चतुर्दशी का व्रत सबसे पहले पांडवों ने रखा था. दुर्योधन से अपना राज्य हराने के बाद पांडव 13 साल वनवास में रहे. तब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से उनके दुखों को दूर करने का उपाय पूछा था. इस पर कृष्ण जी ने युधिष्ठिर से कहा था कि जुआ खेलने के कारण लक्ष्मी तुमसे नाराज हो गई है इसलिए तुम अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु का व्रत रखो. इससे तुम्हारा राज्य तुम्हें वापस मिल जाएगा. तभी से अनंत चतुर्दशी का व्रत रखा जाता है.

अनंत चतुर्दशी की मान्यता

• मान्यता है कि इस व्रत को 14 सालों तक लगातार करने पर विष्णु लोक की प्राप्ति होती है

• व्रत के दौरान केवल मीठी चीजों का ही सेवन करना चाहिए

• इस दिन गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करने से जीवन की परेशानियां दूर हो जाती है

• अनंत चतुर्दशी के दिन अनंत सूत्र भी बांधा जाता है

• कहते हैं जो लोग इसे अपनी कलाई पर बांधते हैं उन्हें सौभाग्य ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है

क्यों बांधी जाती है 14 गांठें ?

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है. इस पूजा में भगवान विष्णु के साथ अनंत सूत्र भी पूजा जाता है. जिसे हाथ में धारण किया जाता है, इस अनंत सूत्र में 14 गांठे लगी होती हैं. अनंत सूत्र में लगी गांठें भगवान विष्णु द्वारा बनाए गए 14 लोकों का प्रतीक होती हैं. माना जाता है कि यह सूत्र हर मुश्किल से मनुष्य को बचाता है.

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