चेन्नई में स्थित अष्टलक्ष्मी मंदिर, यहां आठ रूपों में विराजमान हैं मां लक्ष्मी

-करिश्मा राय तंवर

 

शास्त्रों में देवतों से ज्यादा शक्तिशाली देवी को बताया गया है. हर व्यक्ति अपने जीवन में धन, विद्या, वैभव और शक्ति के लिए देवी की आराधना करता है. आज आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है. जहां मां लक्ष्मी के एक या दो स्वरूपों की नहीं बल्कि 8 स्वरुपों की पूजा की जाती है.

 

 

चेन्नई के अडयार समुद्र तट पर अष्टलक्ष्मी का बेहद खूबसूरत मंदिर स्थित है. अष्टलक्ष्मी मंदिर लक्ष्मी माता के आठ रूपों को समर्पित है. यहां देवी मां के आठ स्वरुपों की अराधना की जाती है. देवी लक्ष्मी के अलावा यहां भगवान विष्णु के 10 अवतार, गणेशजी और अन्य कई देवी-देवताओं की भी मूर्तियां इस मंदिर में सुसज्जित है.

 

 

इस मंदिर में महालक्ष्मी, धनलक्ष्मी, शांता लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, गजालक्ष्मी, आदिलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी और ध्यान लक्ष्मी आदि रूपों में लक्ष्मी जी की मूर्तियां स्थापित हैं. लक्ष्मीजी के ये स्वरूपों की पूजा का फल इनके नाम के अनुसार ही मिलता है.

 

ॐ के आकार में बना मंदिर

चेन्नई में स्थित मां का ये मंदिर ॐ के आकार में बना हुआ है. यहां देवी लक्ष्मी के 8 स्वरूप विराजमान हैं. मान्यताओं के अनुसार, यहां अष्टलक्ष्मी के दर्शन करने से श्रद्धालुओं को धन,विद्या, वैभव, शक्ति और सुख की प्राप्ति होती है. बाहर से मंदिर बेहद खूबसूरत है. दक्षिण भारत के अन्य मंदिरों की तरह ही, यह मंदिर भी विशाल गुंबद वाला है.

 

मंदिर से जुड़ी खास बातें

  • मंदिर का निर्माण 1974 में आरंभ किया गया था
  • मंदिर का निर्माण निवास वरदचेरियार की अगुवाई में बनी समिति ने करवाया था
  • 5 अप्रैल 1976 से इस मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई थी
  • यह मंदिर 65 फीट लंबा और 45 फीट चौड़ा है
  • यह तीन मंजिला मंदिर है, जिसके चारों ओर विशाल आंगन हैं
  • मंदिर में कुल 32 कलशों को नवनिर्मित किया गया था जिसमें गर्भगृह के ऊपर 5.5 फीट ऊंचा सोने का कलश भी शामिल है

 

 

कमल अर्पित करने की परंपरा

यहां कमल के फूल चढ़ाने की पंरपरा है जो लोग इस मंदिर में आकर मां के दर्शन करते हैं वे बहुत सौभाग्यशाली होते हैं. इस मंदिर में 8 कमल पुष्प अर्पित करते हैं क्योंकि इस मंदिर में माता लक्ष्मी 8 स्वरूपों में विराजमान है.

 

विशाल गुंबद वाले अष्टलक्ष्मी मंदिर में देवी लक्ष्मी की सभी प्रतिमाएं अलग-अलग तल पर स्थापित की गई हैं. यहां पूजा की शुरूआत दूसरे तल से होती है, जहां देवी महालक्ष्मी और महाविष्णु की प्रतिमा रखी गई हैं. तीसरे तल पर शांतालक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और गजालक्ष्मी विराजमान हैं.

 

 

चौथे तल पर सिर्फ धनलक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित है. इसके अलावा पहले तल पर आदिलक्ष्मी, धैर्यलक्ष्मी और ध्यानलक्ष्मी का तीर्थस्थल है. सभी प्रतिमाएं घड़ी की सुईयों की दिशा में आगे बढ़ने पर दिखाई देते हैं. आखिर में नवम मंदिर है, जो भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है. दाम्पत्य जीवन का सुख मांगने वाले भक्त, इसके दर्शन किए बिना नहीं जाते.

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