बंगाल चुनाव: आठ चरणों में होने वाले चुनाव के पीछे की कहानी, पढ़िए पूरा विश्लेषण

Bengal Election

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

चुनाव आयोग की और जैसे ही बंगाल चुनाव (Bengal Election) के लिए तारीखों का ऐलान हुआ राजनितिक उथल-पुथल शुरू हो चुकी है। ममता बनर्जी ने तो चुनाव आयोग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन जाहिर सी बात है की आठ चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर कई बातें निकल कर सामने आ रही हैं। इसे लेकर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी ने सवाल खड़े किए हैं कि आखिर बंगाल में 8 चरणों में मतदान क्यों कराया जाएगा। इसे लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

 

कांग्रेस पार्टी की मजबूती के लिए इकट्ठा हुए जी -23 के नेता

 

 

इस मामले में यह कहना है आयोग का

 

 

अक्टूबर 2019 में महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव (Bengal Election) का उदाहरण देते हुए आयोग एक अधिकारी ने कहा कि यह फैसला राज्य चुनाव आयोग और कानूनी एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित होता है। आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि तब 288 सीटों वाले महाराष्ट्र और 90 सीटों वाले हरियाणा में एक ही राउंड में वोटिंग कराई गई थी, लेकिन 81 सीटों वाले झारखंड में 5 राउंड में वोटिंग हुई थी। आयोग के अधिकारी ने कहा कि इसकी वजह कानून व्यवस्था की स्थिति झारखंड में अन्य राज्यों के मुकाबले अलग होना था।

 

 

चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाना सही नहीं

 

इस समय अगर कोई दल चुनाव आयोग की मंशा पर (Bengal Election) सवाल उठाता है तो वो भी सही नहीं होगा क्योंकि चुनाव आयोग एक ऐसा संगठन है जो किसी के दबाव में काम नहीं करता है। भारत के संविधान में चुनाव आयोग को निष्पक्ष संस्था करार दिया है। हालांकि यह भी सही है कि किसी-किसी बात को लेकर चुनाव आयोग विपक्ष की रिडार में आ जाता है।

 

एक चरण में स्थिति बिगड़ी तो बाकी में मिल जाता मौका

 

 

सूत्रों के अनुसार कई बार ग्राउंड पर स्थिति बदलती है तो (Bengal Election) पार्टियों को पर्याप्त समय सुधार के लिए मिल जाता है। दूसरे चरण के अनुसार पार्टियां अपनी रणनीति बदल लेती हैं और कई बार क्षेत्र के हिसाब से मुद्दों पर फोकस करते हुए आगे बढ़ती हैं। इसके अलावा पार्टी के कैडर में आंतरिक कलह से निपटने में भी मदद मिलती है। एक नेता ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि मत प्रतिशत कम रह जाता है। ऐसी स्थिति में पार्टी लीडरशिप अपने काडर को मोबिलाइज करती है कि कैसे वोटर्स का टर्नआउट बढ़ाया जाए।

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