Dr. Rajendra Prasad: सादगी से भरे डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन की जानें कुछ बातें

Dr. Rajendra Prasad

-आकृति वर्मा

 

बिहार के सीवान में 3 दिसंबर 1884 को जन्में देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad) की आज 136वीं जयंती है। वह देश के ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने कभी अपना वेतना पूरा खुद नहीं रखा। वह अपना आधा  राष्ट्रीय कोष में दान कर देते थे। डा. राजेंद्र प्रसाद एक ऐसे एक एकमात्र राष्ट्रपति थे जिनका कार्यकाल एक से ज्यादा बार रहा था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार के छपरा जिले के एख स्कूल से हासिल की है। वहीं पटना से वकालत (Law) की डिग्री हासिल की है।

 

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हमेशा सादगी को अपने जीवन में सबसे पहले रखने वाले वही पहले ऐसे राष्ट्रपति (Dr. Rajendra Prasad) थे जिन्होंने अंग्रेजी तौर तरीकों को अपनाने से इनकार कर दिया था और जमीन पर आसन बिछाकर भोजन किया करते थे। वहीं बड़े राष्ट्रपति भवन में वह सिर्फ महज दो-तीन कमरों का अपने काम के लिए इस्तेमाल करते थे। डा. राजेंद्र प्रसाद 1950-62 के बीच राष्ट्रपति के पद पर रहे। वहीं साल 1962 के बीच उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

 

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उनके राजनीतिक कार्यकाल की बात करें तो डा. राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी के बेहद करीबी सहयोगी थे। वह आजादी के बाद भारत के पहले राष्ट्रपति बने। वहीं राजेंद्र प्रसाद को ‘नमक सत्याग्रह’ और ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान जेल में भी जाना पड़ा था। वहीं कुछ समय बाद उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था। बता दें कि डा. राजेंद्र प्रसाद अपने समय के काफी जाने माने वकील थे। वह चाहते तो अपने जीवन में धन-दौलत को जमा खूब पैसा कमा सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन को सादगी से भर कर रखा। वहीं 28 फरवरी 1963 को 78 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

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