किसानों के हितैषी बनने का दिखावा करने वाली केजरीवाल सरकार की नीतियां किसान विरोधी है: BJP

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किसान विरोधी केजरीवाल सरकार की गांव-देहात और कृषि क्षेत्र के प्रति असंवेदनहीनता और झूठे-बेबुनियाद बयानबाजी कर दिल्ली के लोगों को गुमराह करने की प्रवृत्ति का आरोप लगाते हुए सांसद प्रवेश साहिब सिंह और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  रामवीर सिंह बिधूड़ी ने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रमुख नवीन कुमार, प्रदेश प्रवक्ता मोहन लाल गिहारा एवं नीतू डबास उपस्थित थीं।

 

दिल्ली सरकार द्वारा किसानों को किए गए पुराने वादों को दोहराते हुए नेताप्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल को किसानों के मुद्दे पर मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी गांव में चर्चा करने की चुनौती दी। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2019 को केजरीवाल सरकार के मंत्री श्री गोपाल राय ने प्रेस वार्ता में यह घोषणा की थी कि केजरीवाल सरकार दिल्ली के किसानों को केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य से गेहूं पर 776 रुपए प्रति क्विंटल अधिक और धान पर 897 रुपए प्रति क्विंटल अधिक की दर से भुगतान करेगी। 6 फरवरी को स्वयं मुख्यमंत्री केजरीवाल ट्वीट करके या जानकारी दी थी कि धान और गेहूं की कीमत बढ़ा दी गई है और डॉ स्वामीनाथन की रिपोर्ट भी लागू की गई है, जिसके लिए दिल्ली सरकार लगभग 100 करोड़ रुपए किसानों की भलाई के लिए खर्च करेगी। इसके लिए पूरे काफी विज्ञापन भी दिए गए लेकिन आज तक एक भी किसान को बढ़ी हुई रकम नहीं दी गई। घोषणा के संदर्भ में कई बार किसान संगठनों के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को पत्र लिखा उनसे मिलने की कोशिश, लेकिन मुख्यमंत्री मिलने को तैयार नहीं हुए। रामवीर बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल किसान विरोधी हैं

 

बीजेपी सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह गांव-देहात के इलाकों में जाकर ग्रामीणों की समस्या को जाने, इसलिए वह अपने मंत्रियों को भेजते हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल की सरकार के मंत्री श्री गोपाल राय ने गांवों में पंचायत बैठक के दौरान किसानों को आश्वस्त किया था कि चुनाव के बाद केजरीवाल सरकार उनकी फसलों के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा मूल्य देगी, किसके विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च हुए लेकिन आज तक एक भी रुपए की फसल नहीं खरीदी गई। आज दिल्ली के मंत्री जिन्हें दिल्ली के गांव के नाम नहीं पता, रास्ते नहीं पता वह प्रेस वार्ता कर गांव की बात करते हैं। सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि दिल्ली में कोई कृषि मंत्री नहीं है। पिछले 6 सालों में अब केजरीवाल सरकार को यह याद आया है कि दिल्ली के किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि चुनाव के पहले तो केजरीवाल सरकार ने वादा किया था कि दिल्ली के किसानों की फसल वह स्वंय खरीदेगी, उस वादे का क्या हुआ?

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