नवरात्र के दूसरे दिन होती है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, सिद्धि प्राप्ति के लिए भक्तजन करते हैं मां की स्तुति

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

नवरात्र का त्योहार शुरु हो चुका है. मां के दरबार में भक्तों का मेला भी लग चुका है. नवरात्र के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है. मां का दूसरा स्वरुप अत्यंत ही कोमल और सुंदर है. आदिशक्ति मां अपने दूसरे स्वरुप में ब्रह्मचारिणी के रुप में अपने भक्तो को दर्शन देती है.

 

मां ब्रह्मचारिणी की स्तुति भक्तों के सभी दुखों को दूर कर उनका जीवन सुखमई बना देती है. मां ब्रह्मचारिणी में ब्रह्म शब्द का मतलब तपस्या है. वहीं चारिणी का अर्थ आचरण करने से है. मां ब्रह्मचारिणी तपस्या करने वाली है और इसलिए उनका स्वरुप अत्यंत ही कोमल और मन को शांति प्रदान करने वाला है.

 

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप

 

 

  • मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में कमण्डल है

 

  • माँ दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनन्तफल देने वाला है

 

  • इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, , सदाचार और संयम की वृद्धि होती है

 

  • जीवन के कठिन संघर्षों में भी उसका मन कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं होता

 

  • मां के मंत्रों का जाप कर भक्तजन उन्हें प्रसन्न कर सकते है

 

कैसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

 

  • मां ब्रह्मचारिणी को पीला और सफेद रंग पसंद है

 

  • मां की पूजा में सफेद और पीले रंग के कपड़े का इस्तेमाल करें

 

  • मां ब्रह्मचारिणी को साबूत लौंग, सुपारी, पान अर्पित करें

 

  • कुमकुम से मां की तस्वीर को टीका लगाएं

 

  • दूध, दही से बनी चीज का मां को सेवन करवाएं

 

मां के स्वरूप से जुड़ी कहानी

 

मां के ब्रह्मचारिणी स्वरुप के पीछे एक कहानी छुपी है दरअसल नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए मां ने घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया. एक हजार साल तक मां ने केवल फल-फूल खाकर बिताए. कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे धूप और बारिश में कष्ट सहे. मां ने कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या की, जिसके बाद मां को पति रुप में भगवान शिव-शंकर प्राप्त हुए.

 

मां की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए. मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होती है. मां ब्रह्मचारिणी भक्तों को अनंत फल देने वाली है. मां भक्तों की बाधाओं को दूर कर उनका जीवन सुख-समृद्धि से भर देती है.

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