CAA और NRC पर हुए हिंसक प्रदर्शन पर बोले आर्मी चीफ बिपिन रावत, ये नेतृत्व का काम नहीं

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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश में काफी बवाल मचा। हिंसा को लेकर आर्मी चीफ बिपिन रावत ने नाराजगी जताई। CAA को लेकर देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई तोड़फोड़ को लेकर बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि नेता वे नहीं हैं जो हिंसा करने वाले लोगों का साथ देते हैं। छात्र विश्वविद्यालयों से निकलकर हिंसा पर उतर गए, लेकिन हिंसा भड़काना नेतृत्व करना नहीं है। सेना प्रमुख ने नेतृत्व पर बोलते हुए कहा कि यह आसान काम नहीं बल्कि बहुत मुश्किल काम है। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि लीडरशिप एक मुश्किल काम है क्योंकि जब आप आगे बढ़ते हैं तो बड़ी संख्या में लोग आपको फॉलो करते हैं। यह दिखने में सामान्य लगता है, लेकिन यह बहुत-बहुत मुश्किल काम है क्योंकि आपके पीछे एक बहुत बड़ी भीड़ है।

एनआरसी और सीएए को लेकर देश में जारी विरोध और कई विश्वविद्यालयों में हुए प्रदर्शन पर भी सेना प्रमुख ने सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने किसी विश्वविद्यालय का नाम लिए बिना कहा कि नेतृत्व क्षमता वह नहीं है जो लोगों को गलत दिशा में लेकर जाती हो। आज हम सब बड़ी संख्या में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों की अगुआई में कई शहरों में भीड़ और लोगों को हिंसक प्रदर्शन करते देख रहे हैं। यह नेतृत्व क्षमता नहीं है।

सियाचिन में डटे जवानों को आर्मी चीफ ने किया याद

सेना प्रमुख ने इस दौरान कड़कती ठंड में देश की सेवा कर रहे जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘आज हम जब खुद दिल्ली में खुद को ठंड से बचा रहे हैं तो मैं अपने उन सैनिकों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना चाहता हूं, जो सियाचिन में सॉल्टोरो रिज पर लगातार खड़े रहते हैं और अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर पहुंचते हैं जहां तापमान -10 से -45 डिग्री के बीच रहता है।

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