क्या सोशल मीडिया वास्तव में डिप्रेशन का कारण बन सकता है?

Depression

 

-कीर्ति दीक्षित

 

कनेक्शन और संचार मानव व्यवहार के दो महत्वपूर्ण तत्व हैं; मनोवैज्ञानिक भलाई को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है। सोशल मीडिया (Depression) हर किसी के जीवन का एक महत्तवपूर्ण हिस्सा बन गया है; इसलिए, दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए यह संभव बनाता है कि वे अपने प्रियजनों, मित्रों या परिवारवालों के साथ जुड़ें रहें। लेकिन सोशल मीडिया के निरंतर उपयोग के साथ, इस तथ्य को स्वीकार करना काफी महत्वपूर्ण है कि यह बहेद ही मतलबी भी है, क्योंकि इसके जरिए जो लोग कनेक्ट होते हैं, ये उनके स्टेटस, इमेज, वीडियो के साथ दूसरों को अपडेट रखता है, जिससे लोगों के जीवन में अवसाद पैदा हो सकता है।

 

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सोशल मीडिया पर लगभग सभी, यानी, दुनिया भर में 3.48 बिलियन से अधिक लोग (ग्लोबल डिजिटल रिपोर्ट, 2019), मिलेनियल्स का 90.4%, जेनरेशन Z का 77.5%, और बेबी बूमर्स (Emarketer, 2019) का 48.2% है। सोशल मीडिया (Depression) पर विशिष्ट गतिविधियाँ – उनके वर्तमान जीवन की घटनाओं के बारे में स्थिति को अपडेट करना जैसे कि नई नौकरी पाना, स्नातक होना, किसी के साथ रिश्ते में आना, कार या घर जैसी ज़रूरत की चीज़ें खरीदना। इसके अलावा आप अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ भी जुड़ सकते हैं।

 

तो, इन सभी सोशल मीडिया (Depression) गतिविधियों के साथ, कोई अवसाद से क्यों जूझता है? क्या यह सब सिर्फ लाइक और शेयर के लिए है? ये दोनों ऐसे गुण हैं जो लोगों को खुश और संतुष्ट करते हैं। एक नए अध्ययन से पता चलता है कि सोशल मीडिया अपने उपयोगकर्ता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। यह उनके निर्णय लेने, रिश्तों और आसपास के लोगों के साथ दोस्ती को प्रभावित करता है।

 

जब सोशल मीडिया की बात आती है, तो उपयोगकर्ता महान कैरियर से लेकर एक सफल रिश्ते तक का दिखावा करता है। बाकि उपयोगकर्ता जब इन पोस्ट को देखते हैं, तो वो खुद को लेफ्ट आउट महसूस करते हैं।

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