सी.बी.आई राजनीति के लिए इस्तेमाल की जाती है, बिना आज्ञा एजेंसी को पंजाब में दाखि़ल नहीं होने दिया जाएगा : कैप्टन

Share

– नवदीप छाबड़ा 

 

बरगाड़ी मामले में सी.बी.आई. के बुरे रिकॉर्ड के चलते जहाँ उन्होंने मामले को बिना जांच के बंद कर दिया, का हवाला देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्रीय जांच ब्यूरो को अपने राज्य में बिना आज्ञा के दाखि़ल होने की इजाज़त नहीं देगी। पंजाब समेत आठ राज्यों द्वारा सी.बी.आई. को बिना आज्ञा दाखि़ल होने की इजाज़त वापस लेने की तरफ इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एजेंसी का अधिक से अधिक प्रयोग राजनीति करने के लिए किया जा रहा है और सी.बी.आई. के द्वारा निष्पक्ष जांच यकीनी नहीं बनाई जा सकती।
भारतीय जनता पार्टी को पंजाब के राजसी क्षेत्र में महत्तवहीन गिनते हुए मुख्यमंत्री ने एक टी.वी. चैनल को कहा कि भाजपा का राज्य में सभी 117 विधानसभा सीटों पर लडऩे के लिए स्वागत है, परन्तु यह पार्टी बिना किसी गठजोड़ हिस्सेदार के एक भी सीट नहीं जीत सकती। उन्होंने कहा कि वास्तव में कांग्रेस को पंजाब में कोई चुनौती नहीं है। यहाँ तक कि अकाली दल और आम आदमी पार्टी से भी कोई ख़तरा नहीं है। उन्होंने कहा कि इन पार्टियाँ में से किसी ने भी राज्य के हित के लिए कभी भी सकारात्मक बात नहीं की।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि राज्य में मतदान को अभी 18 महीने के करीब समय पड़ा है और यह कहना संभव नहीं कि मतदान के समय पर कौन सा मुद्दा भारी रहेगा। उन्होंने उम्मीद अभिव्य की कि भाजपा किसानों की मुश्किलों का जल्द हल करेगी। उन्होंने कहा कि किसान एम.एस.पी. का बनाए रखना चाहते हैं और भारत सरकार को यह यकीनी बनाने के लिए कदम उठाने चाहिएं। उन्होंने केंद्र और किसानों दोनों द्वारा सख्त फ़ैसले पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि किसान संघर्ष लंबे चलने से सरहद पर बैठे सैनिकों को पहुंचाई जाने वाली सप्लाई प्रभावित होगी, जबकि यह पंजाब के हितों का भी नुकसान कर रहा है। उन्होंने कहा कि हालाँकि संघर्ष किसानों का प्रजातांत्रिक और संवैधानिक हक है, जिसका केंद्र सरकार को भी एहसास है क्योंकि उनकी तरफ से बातचीत के लिए किसान संगठनों को बुलाने का फ़ैसला किया गया था।
मुख्यमंत्री ने यह बात दोहराई कि वह कॉर्पोरेटों द्वारा पंजाब में अनाज खरीदने का स्वागत करते हैं, बशर्ते वह मौजूदा मंडीकरण व्यवस्था का पालन करते हों, जो किसान और आढ़तिओं के बीच नज़दीकी संबंधों पर बना हुआ है। उन्होंने भाजपा के उन दोषों को रद्द किया जिसमें उन्होंने कांग्रेस और अन्य केंद्र विरोधी पार्टियों पर किसानों को गुमराह करने के दोष लगाए थे। उन्होंने कहा कि समूची पंजाब विधानसभा ने सर्वसहमति ने कृषि कानूनों को रद्द किया चाहे कि कुछ पार्टियों ने अपनी राजसी मजबूरी के चलते बाद में यू-टर्न ले लिया। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जब बिलों को संसद में लाया जा रहा था तो पंजाब सरकार समेत सभी सम्बन्धित पक्षों की राय लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि यह सब करने की बजाय बिना बहस के बिल पास कर दिए गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *