आज से शुरू हो गई छठ पूजा, जानिए किस दिन क्या होता है और क्यों हैं इस पर्व का महत्व ?

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रवि श्रीवास्तव 

 

लोकआस्था के महापर्व को छठ पूजा कहते हैं, छठपूजा एक मात्र ऐसी पूजा है जिसे लगभग देश के हर कोने में मनाया जाता है, वैसे तो विशेष रूप से ये पर्व बिहार का है। लेकिन प्रबल आस्था की वजह से अब ये हर जगह मनाए जाने लगा है। छठ पूजा का महत्व किस कद्र है इसे ऐसे समझिए कि कई जगह मुस्लिम समुदाय के लोग इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं

 

दीवाली के छठे दिन आती है पूजा 

वैसे तो छठ पूजा दिवाली के छठे दिन आती है लेकिन इसकी शुरूआत चौथे दिन से ही हो जाती है क्योंकि हर साल  ये उत्सव चार दिन चलता है। इस बार  पहले दिन यानी 18 नवंबर को नहाय-खाय है, 19 को खरना, 20 को छठ पूजा और 21 को सुबह सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

 

कौन हैं छठी मईया और सूर्य की पूजा क्यों ?

हिंदु धर्म की मान्यताओँ के मुताबिक 33 करोड़ देवी देवता इस संसार में हैं, लेकिन जिन्हें हम महसूस करने के साथ-साथ अपनी आंखों से देख सकते हैं  वों सूर्य भगवान हैं। लिहाजा छठ पर्व प्रकृति के प्रति अपना आभार प्रकट करने का भी पर्व है। हालांकि माना जाता है कि छठ माता सूर्यदेव की बहन हैं। जो लोग इस तिथि पर छठ माता के भाई सूर्य को जल चढ़ाते हैं, उनकी मनोकामनाएं छठ माता पूरी करती हैं। छठ माता बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं। इस व्रत को करने से संतान को लंबी आयु का वरदान मिलता है। मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है

 

36 घंटे का सबसे कठिन व्रत

छठ पूजा का महत्व कठिन व्रत से भी बढ़ जाता हैं, क्योंकि ये व्रत त्याग..तपस्या और समपर्ण का भाव सिखलाता है इसलिए जो भी इस व्रत को करता है उसे कठिन परिश्रम से भी गुरजना पड़ता है। नहाय-खाय से इस व्रत की शुरू आती है जब शुद्धि की शुरूआत होती है इस दिन के बाद शुद्धता और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसके बाद आता है खरना जिसमे रात को छठी मइया को याद कर महज विशेष रूप से पकी खीर खाने का महत्व है और फिर अगले दिन डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य देकर व्रत करने वाली महिलाएं घर आती है और अगले दिन उगते हुए सूर्य का इंतजार पानी में उतरकर करती हैं इस दौरान भगवान सूर्य के उगने पर ही उन्हें अर्घ्य देकर इस व्रत को सम्पन्न किया जाता है

 

 

 

 

 

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