कोरोना की जांच से घबराया चीन, अमेरिका के जासूस कर रहे जांच

 

दुनिया मे कोरोना को आए डेढ साल से ज्यादा का समय हो गया और आज भी हरदिन पांच लाख के आस पास कोरोना के नए मामले सामने आ रहे है.लेकिन दुनिया आज भी यह जानना चाहती है की यह बिमारी आई कहां से. इस बीच WHO ने चीन के अंदर जाकर लैब में जांच की बात कहीं है.जिससे चीन बोखला गया है

 

कोरोना को लेकर चीन की मुश्किले खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं.चीन इस कोशिश में है की वो कोरोना की जांच से बच जाए.लेकिन दुनिया ने ठान लिया है की वो कोरोना की जड़ तक जाएगा और सबकुछ पता लगा के रहेगा. कोरोना को दुनिया में आए डेढ साल से ज्यादा का समय हो गया है.लाखो लोगों की मौत हो चुकी है.कोरोडो लोग संक्रमित हो चुके हैं.मगर दुनिया आज तक यह पता नहीं लगा पाई की कोरोना पैदा कहां से हुआ है.क्या कोरोना के पीछे चीन का बुहान लैब है या फिर बुहान के मीट मार्केट से कोरोना फैला था.

 

WHO की लैब जांच से कांपा चीन

 

दुनिया की तमाम रिपोर्ट में यह दावा किया जा चुका है की चीन के बुहान से कोरोना निकला था. लेकिन ड्रैगन ने इस थ्योरी को बेकार साबित करने की कोई भी कोशिश नहीं छोड़ी है. अब एक बार फिर से चीन ने लैब थ्योरी की जांच को न सिर्फ कॉमन सेंस का अपमान बताया है बल्कि उसने इसे विज्ञान के प्रति अहंकारी रवैया भी करार दिया है.

 

चीन को लगा था की वो who की छत्रछाया में बच सकता है.मगर अब who ने भी चीन पर नजर टेडी कर ली है. who ने दुनिया के देशो के साथ मिलकर कोरोना की अंतराष्ट्रिय जांच करने का समर्थन किया है. डब्लूएचओ ने यह भी कहा कि इस बार चीन के लैबों की जांच भी की जानी चाहिए. दरअसल, अमेरिका और अन्य देशों की ओर से चीन के वुहान इंस्टि्ट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की जांच कराए जाने को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. इसी हफ्ते के अंत में अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शेरमन चीन के दौरे पर भी रहने वाली हैं.

 

कोरोना के पीछे बुहान लैब का हाथ

 

अंतराष्ट्रिय जांच दल चीन में जाकर वहां जांच करना चाहता है.जहां साल 2019 में पहली बार इस वायरस के मामले सामने आए थे, यानी चीन के वुहान का लैब.दुनिया चीन में जाकर जांच करना चाहती है.मगर चीन इस जांच से बचना चाहता है.इसलिए चीन के उप स्वास्थ्य मंत्री जेंग यीशिन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वह इस प्रस्ताव से बेहद हैरान हैं. व्यावहारिक समझ का अपमान है .बल्कि दुसरे देशों के विज्ञान के प्रति अहंकारी रवैया भी दिखाता है.

 

कोरोना को लेकर चीन पर शिकंजा कसता जा रहा है.अमेरिका ने तो अपने जासूसों को बकायदा आदेश दिया है की वो तह तक जाएं और पता लगाएं की आखिरकार कोरोना कहां से निकला है. वहीं चीन की मुसीबत बढ़ाने का काम वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी किया है. रिपोर्ट में यह दावा किया था कि कोरोना महामारी का पहला मामला दर्ज होने से पहले ही चीन की वुहान लैब के कुछ वैज्ञानिक बीमार पड़े थे और इनमें कोविड जैसे ही लक्षण देखे गए. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि बीमार पड़े कुछ वैज्ञानिकों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. इसके बाद भी चीन ने लैब लीक की थ्योरी को बेतुका बताकर खारिज कर दिया था.

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