दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में ट्विटर के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत, फेक न्यूज फैलाने का आरोप

 

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई करने और जबरन उसकी दाढ़ी काटने को लेकर फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगाते हुए एक व्यक्ति ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में बुधवार को ट्विटर व अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है और उसमें सभी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। यह शिकायत अमित आचार्य नाम के शख्स ने दर्ज करवाई है।

 

शिकायतकर्ता ने कहा, ‘कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप अपलोड किया है, जिसमें अब्दुल समद सैफी नाम के एक बूढ़े व्यक्ति को पीटते हुए और जबरन दाढ़ी काटते हुए दिखाया गया है। यह भी दावा किया गया कि आरोपी हिंदू धर्म के थे और उन्होंने अब्दुल समद सैफी से उनकी इच्छी के विरुद्ध “जय श्री राम” और “वंदे मातरम” के नारे लगवाए।’ शिकायत ट्विटर के अलावा आसिफ खान, आर्फा खानुम शेरवानी, स्वरा भास्कर के खिलाफ की गई है और नागरिकों के बीच ट्विटर के जरिए नफरत फैलाने के आरोप लगाए।

 

पुलिस से लिखित शिकायत में कहा, ‘इन यूजर्स के लाखों फॉलोअर्स हैं और ऑफीशियल अकाउंट्स हैं. इस तथ्य को जानते हुए भी कि उनके ट्वीट्स का समाज में एक प्रभाव पड़ता है, इसके बावजूद घटना की सत्यता की जांच किए बिना उन्होंने सांप्रदायिक रंग दिया. सोशल मीडिया पर इस मकसद से किए गए
ट्वीट धार्मिक समूहों के बीच शांति और सद्भाव में बाधा डालते हैं।’

 

शिकायत में कहा कि घटना का किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक एंगल न होने का तथ्य जानते हुए भी ट्विटर आईएनसी, ट्विटर कम्युनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (टीसीआईपीएल) और भारत में ट्विटर के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष माहेश्वरी ने इन झूठे ट्वीट्स को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।

 

गलत तथ्य पेश कर रहे हैं अब्दुल समद: गाजियाबाद पुलिस

 

इधर, गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि अब्दुल समद शुरुआत से ही पुलिस के सामने गलत तथ्य पेश कर रहे हैं। जांच में पाया कि ‘जय श्रीराम’ के नारे लगवाने जैसा कोई वीडियो और सबूत पुलिस के हाथ नहीं लगा है। पुलिस को शक है कि खुद को फंसता देख अब अब्दुल समद ही गायब हो चुके हैं। पुलिस उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब्दुल का कुछ पता नहीं है. वो न तो अपने बुलंदशहर स्तिथ घर पर मौजूद हैं और न ही पुलिस के संपर्क में हैं। पुलिस ने इस मामले में कल्लू, आदिल, पॉली, आरिफ, मुशाहिद और परवेश गुर्जर को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने इस मामले में साम्प्रदायिक पहलू होने से इंकार किया था और उसने कहा था कि सूफी अब्दुल समद की पिटाई करने वालों में हिन्दू-मुसलमान मिलाकर कुछ छह लोग शामिल थे और सभी उनके द्वारा बेचे गए ताबीज को लेकर नाखुश थे।

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