देश और दुनिया में बढ़ते कोरोना के मामलों ने लोगों के कामकाज को ठप कर दिया है. हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर ये सब कब तक चलेगा? आखिर कब कोरोना से देश को आजादी मिलेगी? कोरोना से आजादी दिलाने वाली वैक्सीन का क्या हुआ? इन सारे सवालों के जवाब आज हम आपकों इस रिपोर्ट के जरिए देंगे…

वैक्सीन को लेकर हमारी ये विस्तृत रिपोर्ट आपकों बताएगी कि आखिर देश और दुनिया में कोरोना की वैक्सीन का काम कहां तक पहुंचा? आखिर किस किस देश में कौन कौन सी कंपनी वैक्सीन पर काम कर रही है? किसे सफलता मिली है ? कहां तक मिली है और मार्केट में वैक्सीन आने में अब कितना वक्त और लगेगा?

वैक्सीन को लेकर 160 से ज्यादा शोध

इंसान vs वायरस की इस जंग में कोरोना वैक्सीन का काम कहां तक पहुंचा. इसकों लेकर आकड़े क्या कहते हैं वो समझिए.

इस वक्त पूरी दुनिया में वैक्सीन के लिए वैसे तो 160 से ज्यादा शोध हो रहे हैं, जिसमें से 138 प्री क्लीनिकल ट्रायल के फेस में हैं .17 पहले में है,9 वैक्सीन ट्रायल के दूसरे फेज में हैं और 3 तीसरे फेज में हैं. फिल्हल मंजूरी किसी वैक्सीन को नहीं मिली है.

कोरोना वैक्सीन के लिए पांच प्रबल दावेदार

भले ही सभी कंपनिया अपने अपने स्तर पर ट्रायल कर रही हैं, लेकिन कोरोना वैक्सीन को लेकर दुनिया में 5 ऐसी कंपनिया हैं,जो वैक्सीन बनाने को लेकर प्रबल दावेदार हैं. आइए हम उनके बारे में भी बताते हैं-

किस देश में वैक्सीन का काम कहां तक पहुंचा ?

1. रूस का सेचेनेव विश्वविद्यालय जिसने क्लीनिकल ट्रायल पूरा कर लिया.

2. चीनी कंपनी साइनौवेक जिसने तीसरे फेज का ट्रायल पूरा कर लिया है.

3. अमेरिका की ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी दूसरे औऱ तीसरे फेज का ट्रायल कर रहीं हैं.

4. चीन की कैनसिनों बायोलॉजिक्स कंपनी ने वैक्सीन के लिए दूसरे फेज का ट्रायल पूरा किया.

5. अमेरिकन कंपनी मॉडर्ना कंपनी फेज 2 का ट्रायल कर रही है.

भारत में कहां पहुंचा वैक्सीन का काम ?

अब सवाल है कि इन विदेशी कंपनियों से इतर स्वदेशी कंपनी यानी भारत में वैक्सीन को लेकर क्या उम्मीदें है और हमारे यहां काम कहां तक पहुंचा है. तो इसका जवाब है हमारे यहां भारत बॉयोटेक कंपनी वैक्सीन बना चुकी है. इसका ट्रायल भी शुरू हो चुका है. फिल्हाल भारत में वैक्सीन का फील्ड ट्रायल चल रहा है. तीसरे फेज में हमारे यहां ट्रायल पुहंच चुका है.

जानिए कैसे मार्केट तक पहुंचती है वैक्सीन

आपके मन में सवाल होगा कि ट्रायल –ट्रायल तक तो ठीक है मार्केट में वैक्सीन आएगी कब ? आखिर और कितने ट्रायल होते है? तो चलिए आपकों सरल भाषा में ये समझाते हैं कि किसी भी वैक्सीन के लिए कितने ट्रायल होते हैं.

मार्केट में इनके बाद आती है वैक्सीन

  • वैक्सीन के लिए सबसे पहले होता है रिसर्च -जो पहला फेज है.
  • वैक्सीन के रिसर्च के बाद प्री क्लीनिकल ट्रायल होता है.
  • प्री क्लीनिकल ट्रायल में जानवरों के ऊपर रिसर्च होता है.
  • प्री के बाद इंसानों पर क्लीनिकल ट्रायल किया जाता है.

क्लीनिकल ट्रायल के भी तीन फेज होते हैं. क्लीनिकल ट्रायल में पहले 100 लोगों पर टेस्ट किया जाता है. सफल होने पर क्लीनिकल ट्रायल में 100 लोगों को शामिल किया जाता है.सफल होने के बाद वैक्सीन बनाने की मंजूरी दी जाती है.बनने के बाद भी गुणवत्ता पर भी काम होता है.

कुल जमा ये कि अभी भी वैज्ञानिकों की मानें तो वैक्सीन में कई महीनों का वक्त लग सकता है. तकनीकी जटिलताओं को लेकर वैक्सीन में कितना समय और लगेगा फिल्हाल पुख्ता तौर पर तो नहीं कहा जा सकता, हालांकि सब कुछ ठीक रहा और सकारात्मक रिजल्ट आए तो भी 12 महीनों तक वक्त वैक्सीन बनाने में लग सकता है .

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