COVID-19: अध्ययन में खुलासा, कोविशील्ड वैक्सीन से हो सकता है रक्त संबंधी यह विकार!

करिश्मा राय

 

करीब एक साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है और पूरा दुनिया कोरोना वायरस जैसी खतरनाक महामारी से जूझ रही है. वहीं भारत में कोरोना की दूसरी लहर काफी कहर बरपाया जिसके बाद अब धीरे-धीरे कोरोना मामलों में गिरावट आ रही है. हालांकि इस कोरोना संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीनेशन का जोरों पर है. हेल्थ एक्सपर्ट कोरोना संक्रमण से सुरक्षा के लिए विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं. लेकिन इस बीच कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने सभी की चिंता बढ़ा दी है.

 

दरअसल भारत में कोरोना की फिलहाल तीन वैक्सीन- कोविशील्ड, कोवैक्सीन और रूस द्वारा निर्मित स्पूतनिक उपलब्ध है.देश में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है. हालांकि इस बीच वैक्सीनेशन को लेकर एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसके कुछ गंभीर दुष्प्रभावों के बारे में खुलासा किया है. वैज्ञानिकों ने लोगों को सचेत करते हुए बताया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन जिसे भारत में कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है, ये वैक्सीन रक्त संबंधी एक विकार का कारण बन सकती है.

 

बता दें कि ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अनुसंधानकर्ताओं के नेतृत्व में हुए अध्ययन में पाया गया कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के कारण रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है. इस समस्या को इडियोपैथिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिक प्यूरपरा (आईटीपी) के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा कुछ लोगों में रक्त का थक्का बनने के मामले भी देखने को मिले हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविशील्ड वैक्सीन के कारण आईटीपी की समस्या हो सकती है, हालांकि इसके मामले बहुत ही कम देखने को मिले हैं. यह अध्ययन जर्नल नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है.

 

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह स्थिति प्रति 10 लाख खुराक में करीब 11 मामलों में हो सकती है. वैज्ञानिकों ने बताया कि 65 से 70 साल की आयु वाले लोग जो पहले ही दिल की बीमारी, मधुमेह या किडनी की बीमारी हो  उनमें इसका खतरा अधिक देखने को मिला है. जबकि कम उम्र के लोगों में ऐसे मामले बहुत ही कम देखे गए हैं.वैज्ञानिकों ने बताया कि चूंकि टीकाकरण कराने वाले बहुत कम लोगों में आईटीपी के मामले देखने को मिले हैं, इस वजह से खून के थक्के जमने के अन्य प्रकारों के लिए भी क्या वैक्सीनेशन जिम्मेदार हो सकता है, इस बारे में पता नहीं लगाया जा सका है.

 

गौरतलब है कि वैज्ञानिकों ने स्कॉटलैंड में टीका लगवा चुके 54 लाख लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया.हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के डर को देखते हुए भी वैक्सीनेशन अभियान प्रभावित नहीं होना चाहिए.

 

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