पराली पर दिल्ली सीएम का बड़ा ऐलान, इस तकनीक से सरकार पराली से करेगी निपटारा

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हर बार दिल्‍ली जबरदस्‍त प्रदूषण की समस्‍या से जूझता है. दिल्‍ली में हर बार प्रदूषण में बढ़ोत्‍तरी में बहुत बड़ा योगदान पड़ोसी राज्‍य हरियाणा और पंजाब में पराली जलने से उठने वाले धुएं से होती है. यही कारण है कि दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस समस्‍या को लेकर गंभीर हो चुके हैं. बुधवार को केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पराली के निदान के लिए पूसा इंस्टीट्यूट के कैप्सूल का जिक्र किया.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा,’इस साल पूसा इंस्टीट्यूट ने हमें पराली का समाधान दिया है. संस्थान ने एक कैप्सूल बनाया है जो गुड़ और बेसन में मिलाओ और घोल बनाकर छिड़को तो पराली का डंठल गल जाता है.’ इसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. दिल्ली सरकार पूसा इंस्टीट्यूट की निगरानी में इस कैप्सूल से घोल बनाएगी.

केजरीवाल ने कहा कि 5 अक्टूबर से इसकी शुरुआत की जाएगी. 12-13 अक्टूबर तक घोल बनकर तैयार हो जाएगा. दिल्ली में 800 हेक्टेयर जमीन पर नॉन बासमती धान उगाया जाता है, जहां पराली होती है और जलाने की नौबत आती है. दिल्ली सरकार किसानों की सहमति से सभी दिल्ली के किसानों के खेत मे मुफ्त छिड़काव करेगी.

केजरीवाल ने बताया कि घोल के छिड़काव के 15-20 दिन में डंठल गल जाएगा और खाद बन जाएगी. खाद बनने से उर्वरक कम लगेगा, ज़मीन भी ज़्यादा उपजाऊ बनेगी. इसकी लागत 30 लाख से भी कम आएगी. केजरीवाल ने केंद्र से अपील की है कि आसपास के राज्यों में भी ज़्यादा से ज़्यादा इसको लागू करवाया जाए.

 

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