क्या पाकिस्तान नहीं चाहता है कि कश्मीर घाटी में निष्पक्ष पंचायत चुनाव हों?

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-अक्षत सरोत्री

 

पाकिस्तान अक्सर कश्मीर को दहलाने के लिए सीमा पार से आतंकी भेजता रहता है। यह पहली बार नहीं है की पाकिस्तान के इशारे पर कश्मीर को दहलाने की साजिश की हो घाटी में कोई भी बड़ी दिक्क्त जब होती है उसका सीधा हाथ पाकिस्तान का ही पाया जाता है। दो साल पहले का पुलवामा हमला हो या फिर कुछ साल पहले का उडी हमला हो पाकिस्तान यही कोशिश में रहता है कि कश्मीर में हमेशा तनाव बना रहे। इसी प्रकार अब पंचायत चुनाव से ठीक पहले जम्मू के नगरोटा में आज सुबह हुआ एनकाउंटर साबुत है कि पाकिस्तान होनी हरकतों से कभी बाज नहीं आएगा।

 

क्या हुआ आज सुबह नगरोटा में

 

 

 

 

जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में सुरक्षा बलों ने ट्रक में छिपकर आ रहे जैश-ए-मोहम्मद के चार दहशतगर्दो को गुरुवार को मौत के घाट उतार दिया, और इस तरह सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की बड़ी साजिश नाकाम कर दी। यह एनकाउंटर उस समय शुरू हुआ जब नरगोटा में टोल प्लाजा पर सीआऱपीएफ और पुलिस के जवानों ने एक ट्रक को चेकिंग के लिए रोका। असल में, खुफिया इनपुट के बाद पुलिस ने नरगोटा इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी थी और हर नाके पर गाड़ियों की जबरदस्त चेकिंग चल रही थी।

 

शक होने पर इसके बाद सुरक्षा बलों ने जब ट्रक की चेकिंग की तो उसमें छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बाद आतंकी जंगल की तरफ भागे। सुरक्षा बल के जवानों ने आतंकियों का पीछा किया। जवाबी कार्रवाई की। जाबांज जवानों की करीब तीन घंटे की कार्रवाई में चारों आतंकी मार गिराए गए। सुरक्षाबलों ने बताया कि यह एनकाउंटर सुबह 4.20 बजे उस दौरान शुरू हुआ था, जब एक ट्रक को टोल प्लाजा के पास रोकने की कोशिश की गई। एनकाउंटर में चार आतंकी मार गिराये गए हैं और उनके पास से 11 एके सीरीज की राइफल बरामद की गई है। उक्त एरिया में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है।

 

6 महीने में 170 हमले और 69 जवान शहीद

 

 

 

केंद्र में मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने से पहले ही सरकारी तौर पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे का दावा किया जा रहा है। चुनावों के दौरान भी नेताओं के बयान में आतंकवाद और आतंकियों को जड़ से हटाने के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन गृह मंत्रालय के ताजा आंकड़े, सरकार के इन दावों की चिकोटी काटते नजर आते हैं। जम्मू-कश्मीर पिछले 6 महीनों में 170 आतंकी हमले झेल चुका है, वहीं इन हमलों में सुरक्षाबलों के 69 जवान अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्ष 2018 में पूरे साल के दौरान कश्मीर में सुरक्षाबलों के 95 जवान शहीद हुए थे।

 

कश्मीरी पंडित सुशील पंडिता की हत्या

 

 

 

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने सोमवार (8 जून) को कश्मीरी पंडित सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अनंतनाग जिले के लारकीपुरा इलाके के सरपंच और कांग्रेस के सदस्य अजय पंडित की उनके गांव में हत्या कर दी थी।

 

इतने आतंकियों को उतारा सुरक्षा बालों ने मौत के घाट

 

 

 

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार इस वर्ष अब तक कई शीर्ष कमांडर समेत 88 आंतकवादी मार गिराए गए और 280 अन्य गिरफ्तार किए गए। पिछले दो सप्ताह में छह शीर्ष कमांडर समेत 22 आतंकवादी मारे गए, जोकि पाकिस्तान और इसकी एजेंसियों के लिए करारा झटका है क्योंकि वे सीमा पार से बड़ी संख्या में आंतकवादियों को भेजकर हिंसा में बढ़ावा देने का कोई अवसर नहीं छोड़ता है।

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