एक दिन के लिए खुलते हैं इस मंदिर के द्वार, मंदिर के बनने से जुड़ी है अनोखी कहानी

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-नीलम रावत, संवाददाता

भगवान के आशीर्वाद लेने का कोई निश्चित समय नहीं होता है. भक्त किसी भी वक्त अपने प्रभु का आशीष प्राप्त कर सकते हैं, उनसे प्रार्थना कर सकते हैं. लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जिसके द्वार केवल एक दिन के लिए खुलते हैं. उस दिन तो भक्त प्रभु का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं लेकिन बाकी के दिन भक्त इनसे दूर ही रहते हैं.

एक दिन के लिए खुलता है मंदिर

 

ये मंदिर मृत्यु के देवता यमराज का है और छत्तीसगढ़ के महासमुंद में यमराज का ये अद्भुत मंदिर स्थित है. यह भारत का पहला ऐसा यमराज मंदिर है जहां श्रद्धालु साल में केवल एक दिन पूजा-अर्चना करने आते हैं. इस मंदिर के कपाट केवल भाईदूज के दिन खुलते हैं. भाई दूज के दिन यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है.

इस मेले में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं. बाकी 364 दिन यहां लोग ‘मौत के देवता” को दूर से ही प्रणाम करके आगे बढ़ जाते हैं. मंदिर को बने हुए अभी 2 से 3 साल का समय ही हुआ है. इस मंदिर के बनने से जुड़ी कहानी भी काफी हैरान कर देने वाली है.

मंदिर निर्माण से जुड़ी कहानी

इस मंदिर का निर्माण जिस स्थान पर हुआ है वहां अक्सर दुर्घटनाएं होती थी. एक बार भीषण हादसा नंदकुमार सोनी के साथ हुआ. उनकी मौत की खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई. हालांकि नंदकुमार को अस्पताल में भर्ती करवाया गया. जहां वो मौत के मुंह से वापस लौट आए.

 

तब उन्होंने दुर्घटनास्थल पर मृत्यु के देवता यमराज का मंदिर बनवाने का फैसला किया. काफी मुश्किलों के बात वह यमराज और उनकी बहन यमुना का मंदिर बनाने में सफल हो पाए. भाई-दूज के अवसर पर इस मंदिर में यमराज और यमुना की प्रतिमाओं को प्राण प्रतिष्ठित किया गया.

इस अवसर पर बड़ी संख्या में मंदिर में श्रद्घालु पहुंचे थे. उसके बाद से हर साल भाई-दूज के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. दूर-दराज से इस मौके पर भक्त मां यमुना और यमराज के दर्शन करने आते हैं और दीर्घायु का आशीर्वाद लेकर जाते हैं.

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