डीआरडीओ की बनाई स्वदेशी गन, प्रदर्शनी के दौरान बताई गई इसकी खासियतें

DRDO

 

-अक्षत सरोत्री

 

भारतीय सेना ने इनोवेशन डिस्प्ले इवेंट नाम से एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। जिसमें (DRDO) डीआरडीओ ने बुधवार को एक आधुनिक पिस्टल का प्रदर्शन किया, जिसका नाम एएसएमए रखा गया है। ये हथियार पूरी तरह से भारत में ही विकसित किया गया है। अभी तक सैन्य बल 9एमएम की पिस्टल का इस्तेमाल करते थे। जिसे अब बदलने की तैयारी है। इसके अलावा पाकिस्तान भी एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए आतंकी साजिशों को अंजाम देने की फिराक में लगा रहता है। दो दुश्मनों की वजह से भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहा है।

 

यह हैं खासियतें इस पिस्टल की

 

ये आसानी से 100 मीटर तक अपने निशाने को भेद सकती है।

ये इजरायल की Uzi सीरीज की गन की श्रेणी में आती है।

इसे साइज में भी छोटा बड़ा किया जा सकता है।

इसे चलाने के दौरान झटका भी नहीं लगेगा।

यह आवाज भी काम करेगी मतलब दुश्मन को अलर्ट होने का मौका तक नहीं मिलेगा।

 

यह कहना है डीआरडीओ का इसके बारे में

 

डीआरडीओ (DRDO) के मुताबिक उन्होंने सैन्य बलों के ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए इस पिस्टल का निर्माण किया गया है। ये आसानी से 100 मीटर तक अपने निशाने को भेद सकती है। सैन्य बलों को ये जल्द से जल्द इस्तेमाल के लिए मिल सके, इसके लिए इसका ट्रायल भी तेजी से जारी है। डीआरडीओ के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 4 महीने में इस पिस्टल से 300 राउंड से ज्यादा फायर किए गए। अभी तक ये सभी पैमानों पर खरी उतरी है।

 

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सेना के 9एमएम पिस्टल को बदलने की है तैयारी

 

अभी तक सेना 9 एमएम कार्बाइन (DRDO) मशीनगन का इस्तेमाल कर रही है। उसकी जगह पर ज्वाइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन कम रेंज के ऑपरेशन्स के लिए एक खास विकल्प है। ये गन छोटी होती है, ऐसे में ऑपरेशन के दौरान सैनिक इसे आसानी से संभाल सकते हैं। अगर वजन की बात करें तो ये इतनी हल्की है कि कोई भी जवान एक हाथ में इसे लेकर फायरिंग कर सकता है।

 

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