कोरोना काल में मोदी सरकार पर इतना बढ़ा कर्ज, घाटा कम करने के लिए क्या उपाय कर रही सरकार ? जानिए

 

देश भर में कोरोना काल ने आर्थिक पहिए पर रपअतार धीमी कर दी है. सरकार से विपक्ष ने यह जानने की कोशिश की है कि देश पर जीडीपी के मुकाबले कुल कितना कर्ज है. सरकार की तरफ से सदन को जानकारी दी गई है कि देश पर कुल कितना कर्ज है और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सरकार की तरफ से क्‍या-क्‍या किया जा रहा है.

 

कर्ज कम करने की हो रही कोशिश 

 

सरकार पर साल 2019-20 में बाकी देनदारी 1871639 करोड़ रुपए थी और ये जीडीपी का 9.2 फीसदी था. जबकि साल 2020-21 में ये बढ़कर 11953758 करोड़ रुपए हो गया और ये जीडीपी का 60.5 फीसदी था. इसी तरह से सरकार पर कुल ऋण साल 2019-20 में 10499460 करोड़ रुपए था और साल 2020-21 में बढ़कर 11953758 करोड़ रुपए हो गया जो कि जीडीपी का 60.5 फीसदी था. उन्‍होंने बताया कि सरकार का लक्ष्‍य राजकोषीय घाटे को 2025-26 तक 4.5% से कम करते हुए जीडीपी अनुपात में भारत सरकार के कर्ज को कम करना है.

 

वित्‍त राज्‍य मंत्री पंकज चौधरी ने पिछले दिनों रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के हवाले से सदन को बताया था कि देश पर कितना वित्‍तीय कर्ज है. उन्‍होंने कहा कि साल 2021 में मार्च माह के खत्‍म होने तक देश पर विदेशी कर्ज 570 अरब डॉलर था. यह कर्ज कुल जीडीपी का 21.1 फीसदी है.साल 2020 में यह आंकड़ा 558 अरब डॉलर था.

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