काशी का प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर, दुर्गा मां ने इसी स्थान पर किया था विश्राम

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

काशी भोलेनाथ की नगरी है. दूर दराज से भक्त यहां काशी विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं. लेकिन भोलेनाथ की काशी नगरी में मां दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर मौजूद है. इसी स्थान पर मां ने शुम्भ-निशुम्भ का वध करने के बाद विश्राम किया था.

 

 

मां दुर्गा को समर्पित इस मंदिर को दुर्गा कुंड और लाल मंदिर के नाम से जाना जाता है. दुर्गा मां के इस प्रसिद्ध मंदिर का उल्लेख दुर्गा खंड में भी मिलता है.

 

दुर्गा मंदिर का निर्माण

 

 

दुर्गा मंदिर का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है. मंदिर के एक तरफ ‘दुर्गा कुण्ड’ है. दुर्गा मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में बंगाल की रानी भवानी ने करवाया था. मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली की वास्तुकला में बनाया गया था. मान्यता है कि शुम्भ-निशुम्भ का वध करने के बाद मां दुर्गा ने थक कर दुर्गाकुण्ड स्थित मंदिर में ही विश्राम किया था.

 

स्वंयभू है मां की प्रतिमा

 

 

पौराणिक मान्यता के अनुसार जिन दिव्य स्थलों पर देवी मां साक्षात प्रकट हुईं वहां निर्मित मंदिरों में उनकी प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है ऐसे मंदिरों में चिह्न पूजा का ही विधान हैं. दुर्गा मंदिर भी इसी श्रेणी में आता है. यहां प्रतिमा के स्थान पर देवी मां के मुखौटे और चरण पादुकाओं का पूजन होता है. इसके साथ ही यहां यांत्रिक पूजा भी होती है.

 

नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु

 

यूं तो मां दुर्गा के इस प्रसिद्ध मंदिर में श्रद्धालु का आना लगा रहता है लेकिन नवरात्र में तो इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है. शारदीय नवरात्र के चौथे दिन माँ को कुष्माण्डा माता के रूप में पूजा जाता है. इस दौरान मंदिर को भव्य तरीक़े से सजाया जाता है. सावन महीने में भी मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

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