मां शैलपुत्री का प्रसिद्ध मंदिर, नवरात्र के पहले दिन होती है मां की पूजा

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की अराधना होती है. नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की अराधना की जाती है. शैलपुत्री मां का प्रसिद्ध मंदिर मौजूद है वाराणसी में. जहां नवरात्र के मौके पर भक्त खासतौर से दर्शन करने जाते हैं और मां का आशीर्वाद पाते हैं.

 

 

मंदिर से जुड़ी कहानी

 

 

काशी के अलईपुर में मां शैलपुत्री का प्राचीन मंदिर है. वाराणसी के मां शैलपुत्री के इस मंदिर के बारे में एक कथा बहुत ही प्रचलित है. कहा जाता है कि मां पार्वती ने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं. एक बार की बात है जब माता किसी बात पर भगवान शिव से नाराज हो गई और कैलाश से काशी आ गईं और काशी में ही विराजमान हो गई.

 

नवरात्र में पूरी होती है हर मुराद

 

इस मंदिर की मान्यता है कि नवरात्र के पहले दिन इनके दर्शन से भक्तों की हर मुराद पूरी होती है. नवरात्र में मां के दर्शन से वैवाहिक कष्ट दूर हो जाते हैं इतना ही नहीं यहां नवरात्र के पहले दिन भक्त मां के दर्शन को इतने आतुर रहते हैं कि नवरात्र के एक दिन पहले से ही मां के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग जाती हैं.

 

तीन बार होती है आरती

 

 

मां शैलपुत्री के इस मंदिर में दिन में तीन बार आरती होती है और चढ़ावे में इन्हें नारियल के साथ-साथ सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है. मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का है. मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है. इनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल है. इन्हें पार्वती का स्वरूप भी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी. इनके दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट दूर हो जाते हैं.

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