किसान आंदोलन: अपनी मांगों पर अड़े किसान, आज की बैठक में निकलेगा समाधान ?

Farmer Protest

 

-अक्षत सरोत्री

 

किसानों और सरकार के बीच कृषि कानून को लेकर गतिरोध जारी है। लगभग 10 दौर की वार्ता दोनों पक्षों के बीच हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई सटीक नतीजा नहीं निकला है। आज किसानों और सरकार के बीच 11वें दौर की वार्ता होनी है। सरकार किसान संगठनों (Farmer Protest) के साथ जारी गतिरोध तोड़ने के लिए फैसला लेते हुए अपने तीनों नए कृषि कानूनों पर डेढ़ साल तक रोक लगाने का प्रस्ताव किया था। जिसे किसानों ने ठुकरा दिया। किसानों की मांग है तीनों कानून को पूर्ण रुप से वापस लिया जाए।

 

मंगवाया काऊ डंग केक और निकले गाय के उपले, पढ़े पूरी खबर

 

फिलहाल प्रस्ताव खारिज किया है किसानों ने

 

किसानों की ओर से प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद बहुत कुछ फिर से सुप्रीम कोर्ट के पाले में आ गया है। फिलहाल माना जा रहा है कि सरकार अपने प्रस्ताव पर डटी रहेगी। ऐसे में संभव है कि तीनों कानून लंबे समय के लिए ठंडे बस्ते में चले जाएं। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन (Farmer Protest) और सरकार की घेरेबंदी के बीच राजनीति और इतिहास ने खुद को दोहराया है। पहले कार्यकाल में भी नरेंद्र मोदी सरकार को लगभग डेढ़ साल के अंदर भूमि अधिग्रहण विधेयक पर पैर खींचने पड़े थे।

 

डिजिटल पेमेंट करने में इस वजह से आ सकती है दिक्कत

 

इसी तरह भूमि अधिग्रहण अध्यादेश भी हो चुका है वापस

 

सरकार ने विकास को ध्यान में रखकर बनाए गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तीन बार जारी किया था, लेकिन किसानों (Farmer Protest) और राजनीतिक दलों के दबाव में आखिरकार सरकार को उसे वापस लेना पड़ा था। नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल को भी लगभग डेढ़ साल हो गए हैं और कृषि कानून पर सरकार नरम पड़ गई है। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के वक्त भी प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में घोषणा की थी, ‘हमारी सरकार के लिए जय जवान, जय किसान केवल नारा नहीं है.. किसानों की भलाई के लिए हम किसी भी सुझाव पर चर्चा के लिए तैयार हैं।’ लगभग वही संदेश फिर से देने की कोशिश हुई है। बताया जा रहा है कि यह फैसला लेने में सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी काम आया।

 

सृष्टि गोस्वामी बनेंगी एक दिन के लिए बाल मुख्यमंत्री, त्रिवेंद्र रावत ने दी सहमति

 

सरकार की कोशिश किसान आएं साथ

 

सरकार किसी भी कीमत पर किसानों (Farmer Protest) को साथ लेकर ही चलना चाहती है। वैसे भी पंजाब और हरियाणा को छोड़कर बाकी प्रदेशों में इसका असर नहीं है। डेढ़ साल तक क्रियान्वयन पर रोक का अर्थ है कि वर्ष 2022 की जुलाई तक इस पर कदम नहीं बढ़ेंगे। यह वह काल होगा जब 2024 के लोकसभा चुनाव में दो साल से भी कम वक्त बचेगा। जाहिर है सरकार की ओर से किसानों को मनाने और समझाने की कवायद जारी रहेगी, लेकिन कदम रुके रहेंगे।

 

अरिंदम भट्टाचार्य ने थामा भाजपा का दामन, तुषार भी हो सकते हैं शामिल

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *