Wednesday, February 1, 2023
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जापान गिरती जन्म दर के कगार पर : किशिदा

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Fumio Kishida, टोक्यो 24 जनवरी (वार्ता) : जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा है कि उनका देश गिरती जन्म दर के कारण एक समाज के रूप में कार्य करने में सक्षम नहीं होने के कगार पर है। किशिदा ने यहां सांसदों के साथ एक बैठक में कहा कि यह ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का मामला है। उन्होने कहा,“जापान इस कगार पर खड़ा है कि क्या हम एक समाज के रूप में काम करना जारी रख सकते हैं।” करीब 12.5 करोड़ की आबादी वाले जापान में अनुमान है कि पिछले साल 8,00,000 से कम बच्चों के जन्म हुए थे। 1970 के दशक में यह आंकड़ा 20 लाख से अधिक था। जापान के पड़ोसी देशों सहित कई देशों में जन्म दर धीमी हो रही है। पर, यह मुद्दा जापान में विशेष रूप से तीव्र है क्योंकि हाल के दशकों में जीवन प्रत्याशा बढ़ी है, जिसका अर्थ है कि वृद्ध लोगों की संख्या बढ़ रही है और श्रमिकों की घटती संख्या उन्हें समर्थन देने के लिए है।

Fumio Kishida

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, छोटे से राज्य मोनाको के बाद जापान में अब 65 और उससे अधिक उम्र के लोगों का दूसरा सबसे बड़ा अनुपात है। देश में 65 व उससे अधिक उम्र के लोग लगभग 28 प्रतिशत हैं। श्री किशिदा ने कहा,“बच्चों और बच्चों के पालन-पोषण से संबंधित नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना एक ऐसा मुद्दा है जो इंतजार नहीं कर सकता है और न ही इसे स्थगित किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि वह अंततः चाहते हैं कि सरकार बच्चों से संबंधित कार्यक्रमों पर अपना खर्च दोगुना करे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अप्रैल में एक नई सरकारी एजेंसी की भी स्थापना की जाएगी। जापानी सरकारों ने हालांकि, सफलता के बिना पहले समान रणनीतियों को बढ़ावा देने की कोशिश की है। वर्ष 2020 में, शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि सदी के अंत तक जापान की आबादी 2017 में 12.8 करोड़ के शिखर से गिरकर 5.3 करोड़ से कम हो जाएगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में जनसंख्या 12.5 करोड़ से कम है।

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जापान ने कुछ छूट के बावजूद सख्त आप्रवासन कानूनों को लागू करना जारी रखा है, लेकिन कुछ विशेषज्ञ अब कह रहे हैं कि अपने वृद्ध समाज से निपटने में मदद के लिए नियमों को और ढीला किया जाना चाहिए। गिरती जन्म दर कई कारकों से प्रेरित होती है, जिसमें रहने की बढ़ती लागत, शिक्षा और काम में अधिक महिलाएं शामिल हैं। साथ ही गर्भनिरोधक तक अधिक पहुंच, जिससे महिलाएं कम बच्चे पैदा करने का विकल्प चुनती हैं।

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