दिल्ली सरकार ने द्वेष के कारण निगम का फंड रोका-प्रवीण शंकर

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-प्रणय शर्मा, संवाददाता

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि देश की संघीय व्यवस्था के अनुसार नगर निगमों एवं पालिकाओं को राज्य सरकार एकत्र करों में से वार्षक फंड़ देती हैं। इसका बजट प्रावधान होता है और ऐसे अनेक कर हैं जिन्हें राज्य सरकार निगमों के नाम पर एकत्र करती हैं जैसे सम्पत्ति पंजीकरण शुल्क आदि। वही व्यवस्था दिल्ली पर भी लागू है पर राजनीतिक द्वेष के चलते गत 6 सालों से दिल्ली सरकार न तो दिल्ली नगर निगमों को उनका बजट में आवंटित पूरा फंड़ देती है और न ही तय समय पर देती है। इस सबका नतीजा है कि दिल्ली सरकार को तीनों नगर निगमों का 31 मार्च 2020 तक का लगभग 18,000 करोड़ रूपये बकाया तो देना ही है । वर्तमान 2020-21 वर्ष का आधा वित्त वर्ष बीतने का बाद भी अभी बमुशकिल 25 प्रतिशत फंड़ भी नहीं दिया गया है।

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया से नगर निगमों को वर्तमान वित्त वर्ष 2020-21 में बजट अनुसार दिये जाने वाले फंड़ और जो फंड असल में आज तक जारी किया गया है उसे लेकर 2 सवाल किये हैं । पहला सवाल की आखिर क्यों सरकार एक ओर तो नगर निगमों को उनका बजट फंड़ नहीं दे रही वहीं दूसरी ओर अपने राजनीतिक प्रवक्ताओं से नगर निगमों पर फंड़ भ्रष्टाचार के मनगढ़त आरोप लगवा रही है ? और दूसरा सवाल ये कि क्या यह सच नहीं कि नगर निगमों के लिये 2020-21 के लिये जो बजट स्वीकृत पैसा है उसको निम्न क्रम अनुसार आंशिक रूप में ही आज तक जारी किया गया है ?

भाजपा के प्रवक्ता ने कहा है कि यह एक अकाट्य सत्य है कि अरविंद केजरीवाल सरकार राजनीतिक द्वेष के कारण नगर निगमों को आर्थिक रूप से पंगु बना रही है ।

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