बप्पा की मूर्ति को जल में ही क्यों किया जाता है विसर्जित, जानें कहानी और शुभ मुहूर्त

 

-Ayushi Pradhan

 

देशभर में गणपति महोत्सव शुरू हो चुकी है. हर जगह ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. धीरे-धीरे समय आ रहा है गणपति को विदाई देने का. ऐसे में शुभ मुहूर्त के अनुसार लोग बप्पा का विसर्जन करते हैं. 10 दिन तक बप्पा को घर में रखने के बाद अनंत चतुर्दशी (anant chaturdashi) के दिन गणपति का जल में विसर्जन (ganpati visarjan in water) किया जाता है. इस साल गणपति विसर्जन 19 सितंबर को मनाई जाएगी.

 

गणेश विसर्जन की कहानी (story of ganpati visarjan)

 

गणेश महोत्सव का आखिरी दिन गणेश विसर्जन की परंपरा है. 10 दिवसीय महोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के बाद होता है. परंपरा है कि विसर्जन के दिन गणपति की मूर्ति का नदी, समुद्र या जल में विसर्जित करते हैं. इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. ऐसा माना जाता है कि श्री वेद व्यास जी ने गणपति जी को गणेश चतुर्थी के दिन से महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी, उस समय बप्पा उसे लिख रहे थे. कहानी सुनाने के दौरान व्यास जी आंख बंद करके गणेश जी को लगातार 10 दिनों तक कथा सुनाते रहे और गणपति जी लिखते गए. कथा खत्म होने के 10 दिन बाद जब व्यास जी ने आंखे खोली तो देखा कि गणेश जी के शरीर का तापमान काफी ज्यादा बढ़ गया था. ऐसे में व्यास जी ने गणेश जी के शरीर को ठंडा करने के लिए जल में डुबकी लगवाई. तभी से यह मान्‍यता है कि 10वें दिन गणेश जी को शीतल करने के लिए उनका विसर्जन जल में किया जाता है.

 

यहां से शुरू हुई परंपरा

 

भारतीय इतिहास में इस परंपरा की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र से की थी. उन्होंने ये अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ एकजुट होने के लिए की थी. उन्हें ये बात अच्छे  से पता थी कि भारतीय आस्था के नाम पर एकजुट हो सकते हैं. इसलिए उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश महोत्सव की शुरुआत की और वहां गणेश विसर्जन भी किया जाने लगा.

 

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