पवनपुत्र हनुमान का सबसे अनोखा मंदिर, यहां स्त्री रूप में पूजे जाते हैं बजरंगबली

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-नीलम रावत, संवाददाता

पवनपुत्र हनुमान बाल ब्रह्माचारी कहे जाते हैं. अक्सर पुरुष की बजरंगबली का व्रत रखते हैं लेकिन क्या आप अंजनीपुत्र हनुमान के उस धाम के बारे में जानते हैं जहां उनकी पूजा स्त्री के रूप में की जाती है.

जी हां, बिलकुल सही सुना है आपने. भारत में एक ऐसा अनोखा हनुमान मंदिर है जहां उनकी पूजा स्त्री के रूप में की जाती है और ये मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित है. रतनपुर के गिरजाबांध में मौजूद इस मंदिर में ‘देवी’ हनुमान की मूर्ति मौजूद है. हनुमान जी का यह विश्व में इकलौता ऐसा मंदिर है जहां हनुमान का नारी रूप में पूजन किया जाता है.

स्त्री रूप में क्यों होती है पूजा

मंदिर का निर्माण पृथ्वी देवजू नाम के राजा ने करवाया था. राजा पृथ्वी देवजू हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे. जब राजा कुष्ठ रोग से पीड़ित तब एक रात राजा के सपने में हनुमान जी आए और उन्हें मंदिर बनाने का निर्देश दिया. राजा ने मंदिर का निर्माण शुरू करवाया. जब मंदिर काम पूरा होने वाले था, तब राजा के सपने में फिर हनुमान जी आए और उन्हें महामाया कुंड से मूर्ति निकाल कर मंदिर में स्थापित करने के लिए कहा.

राजा ने हनुमान जी के निर्देशों का पालन किया और कुंड से मूर्ति निकाली गई. लेकिन हनुमान जी की मूर्ति को स्त्री रूप में देखकर हैरान रह गए. फिर महामाया कुंड से निकली मूर्ति को पूरे विधि-विधान से मंदिर में स्थापित किया गया. मूर्ति स्थापना के बाद राजा की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई.

हर मनोकामना पूर्ण करते हैं बजरंगबली

मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाला हर एक भक्त हजारों मन्नतें लेकर आता है. लेकिन कभी भी कोई यहां से निराश होकर नहीं लौटता. यहां कुष्ठ रोग से पीड़ित लोग दूर-दराज से आते हैं और कुंड में स्नान कर जाते हैं. हनुमान का ये इकलौता मंदिर है जहां उनकी पूजा नारी रूप में की जाती है. इसी कारण से लोग दूर-दराज से बजरंगबली के अद्भुत और अविश्वसनीय रूप के दर्शन करने इस स्थान पर आते हैं.

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