नवरात्र के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, मां चंद्रघंटा की आराधना से दूर होता है डर

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

नवरात्रि का त्योहार भक्तों के जीवन में खुशियां लेकर आता है. बुराई पर अच्छाई की जीत का और मां दुर्गा के आगमन का ये पूर्व भक्तजन धूमधाम से मनाते है. मां के आगमन से पहले उनका दरबार सजाया जाता है. मां के मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है.

 

नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना की जाती है. मां चंद्रघंटा का रूप बहुत ही सौम्य है. शेर पर सवार मां चंद्रघंटा असुरों का नाश कर भक्तजनों के जीवन में खुशियों का प्रवाह करती है. मां के दस हाथों में अलग-अलग शस्त्र मौजूद है. जो असुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करते है. मां चंद्रघंटा की आराधना करने वालों का अहंकार नष्ट होता है और उनको सौभाग्य, शांति और वैभव की प्राप्ति होती है.

 

नवरात्र के दिनों में वैसे तो मां दुर्गा की कृपा बड़ी ही आसानी से मिल जाती है लेकिन मां को खुश करने के लिए उनके हर स्‍वरूप की पूजा करने की विधि अलग हैं. मां चंद्रघंटा की उपासना करने से भय का नाश होता है और साहस की प्राप्ति होती है.,शत्रुओं का नाश करने के लिए मां का आशीर्वाद बहुत जरूरी होता है और इसके लिए मां के मंत्र का जाप करना बहुत कल्‍याणकारी माना गया है.

 

कैसा है मां चंद्रघंटा का स्वरुप

 

 

  • मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है ,इसीलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है

 

  • मां चंद्रघंटा सिंह पर विराजती हैं

 

  •  मां चंद्रघंटा देवी का स्वरूप सोने के समान है

 

  •  देवी मां की दस भुजाएं हैं और दसों हाथों में खड्ग, बाण, त्रिशूल, धनुष जैसे अस्त्र-शस्त्र हैं

 

  • मां चंद्रघंटा अपने गले में सफेद फूलों की माला धारण करती हैं

 

ऐसा माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना से मां भक्तों को सभी पाप हर लेती हैं और उसके काम के बीच आने वाली बाधाओं को नष्ट करती हैं. मां चंद्रघंटा सिंह पर सवार हैं इसलिए इनकी पूजा करने वाला पराक्रमी और निर्भय हो जाता है. मां की आराधना से स्वभाव में विनम्रता तो आती ही है साथ ही चेहरे पर सौम्यता भी आती है.

 

कैसे करें मां की पूजा

 

  •  देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए

 

  • मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ है

 

  • इसके अलावा मां को सफेद चीजों का भोग लगाए

 

  • माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है

 

नवरात्रि में तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का अत्यंत ही महत्व है. देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं. मां चंद्रघंटा की उपासना से मनुष्य समस्त सांसारिक कष्टों से मुक्ति पाता है.

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