मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप हैं शैलपुत्री, मां की उपासना से जीवन में आती है स्थिरता

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– नीलम रावत, संवाददाता

 

मां दुर्गा के त्योहार नवरात्रि की शुरुआती हो चुकी है. नवरात्र के प्रथम दिन आदिशक्ति के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की अराधना की जाती है. मां शैलपुत्री का स्वरुप अत्यंत की सुंदर है. अपने आशीर्वाद से मां भक्तों की हर मनोकामना को पूरा कर उन्हें सफल जीवन का आशीर्वाद देती है.

 

मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री है. मां को सती के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपने पूर्वजन्म में देवी शैलपुत्री प्रजापति दक्षराज की कन्या थीं और तब उनका नाम सती था. आदिशक्ति देवी सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था. एक बार दक्षराज ने विशाल यज्ञ आयोजित किया, जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन शंकरजी को नहीं बुलाया. जब सती यज्ञ में पहुंची अपने पति के खिलाफ अपशब्द सुने तो उन्होंने यज्ञ की वेदी में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए.

 

अगले जन्म में देवी सती शैलराज हिमालय की पुत्री बनीं और शैलपुत्री के नाम से जानी गईं. मां शैलपुत्री को पार्वती भी कहा जाता है.

 

मां शैलपुत्री का स्वरूप

 

 

  • प्रथम देवी शैलपुत्री अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती है, जो भगवान शिव का भी अस्त्र है

 

  • देवी शैलपुत्री का त्रिशूल जहां पापियों का विनाश करता है, भक्तों को अभयदान का आश्वासन देता है

 

  • उनके बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है

 

  • कमल अविचल ज्ञान और शांति का प्रतीक है

 

  • भगवान शिव की भांति देवी शैलपुत्री का वाहन भी वृषभ है

 

नव दुर्गा के प्रथम रुप शैलपुत्री की शक्तियां अपरम्पार हैं. मान्यता है कि नवरात्र-पूजन के प्रथम दिन इनकी उपासना करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और देवी मां की कृपा प्राप्त होती है.

 

कैसे करें मां की उपासना

 

 

  • शैलपुत्री की आरती से पहले पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें

 

  • कलश स्थापना के लिए एक लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएं

 

  • एक मुट्ठी में चावल लेकर माता का ध्यान करते हुए से पाटे पर डालें

 

  • कलश को स्थापित कर रोली से स्वास्तिक का निशान बनाएं

 

  • मां शैलपुत्री की तस्वीर पर कुमकुम लगाएं और उन्हें भी चुनरी चढ़ाएं

 

  • भोग के साथ सुपारी, लोंग, घी भी रखें

 

  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें और मां शैलपुत्री की कथा पढ़ें

 

मां शैलपुत्री अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूरा कर. उनका जीवन सुख समृद्धि से भर देती है. मां की अराधना करने से भक्तों के जीवन में स्थितरता आती है और जीवन सुखमय हो जाता है.

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