गूगल और फेसबुक ने ऑस्‍ट्रेलिया में अपनी सेवाएं बंद कर देने की दी धमकी, रेवेन्‍यू शेयरिंग को लेकर भारत में कानून !

 

– कशिश राजपूत

 

 

गूगल और फेसबुक, इंटरनेट जगत की इन दो दिग्‍गज कंपनियों ने पिछले दिनों धमकी दी थी कि वे ऑस्‍ट्रेलिया में अपनी सेवाएं देना बंद कर देंगे।

 

 

डिजिटल प्‍लेटफॉर्म्‍स और न्‍यूज ऑर्गनाइजेशंस के बीच रेवेन्‍यू शेयरिंग को लेकर क्‍या भारत में भी कानून होना चाहिए? ऐसे कानून की वकालत इस वजह से हो रही है क्‍योंकि ऑस्‍ट्रेलिया में इंटरनेट की दिग्‍गज कंपनियां मनमानी पर उतर आई हैं। गूगल ने धमकाया था कि वह अपने सर्च इंजन से ऑस्‍ट्रेलिया को गायब कर देगा तो फेसबुक ने कहा था कि अगर कानून लागू हुआ तो वह ऑस्‍ट्रेलिया के लिए न्‍यूज का एक्‍सेस ही खत्‍म कर देगा।

 

 

बुधवार को फेसबुक ने अपने प्लेटफार्म पर न्यूज साझा करने पर बैन लगा दिया | इसकी चपेट में मौसम विभाग, आपातकालीन विभाग, विपक्षी नेता और स्वास्थ्य विभाग के पेज भी आ गए | गुरुवार की सुबह से ही ऑस्ट्रेलियाई समाचार लेखों की लिंक पोस्ट करने या दुनिया में कहीं से भी समाचार कंपनियों के फेसबुक खातों को लोग देख नहीं पाए | दरअसल फेसबुक ने यह कदम सरकार के उस मसौदे के बदले उठाया है जिसमें समाचारों के प्रकाशन के बदले में गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों को मीडिया कंपनियों को पैसे देने होंगे | आस्ट्रेलिया में ऑनलाइन विज्ञापन में 81 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाले गूगल और फेसबुक ने इस प्रस्तावित कानून की निंदा की है |

 

 

विवाद का कारण-

 

ऑस्ट्रेलिया के न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड के तहत फेसबुक और गूगल को समाचार सामग्री के लिए मीडिया आउटलेट्स को भुगतान के लिए सौदा तय करना होगा नहीं तो कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा | यह नियम पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया की संसद में पेश हुआ था | सरकार संसद का मौजूदा सत्र 25 फरवरी को समाप्त होने से पहले न्यूज मीडिया बारगेनिंग कोड को लागू करने की उम्मीद कर रही है | दूसरी ओर गूगल ने हाल के दिनों में कई मीडिया कंपनियों के साथ पहले ही करार कर लिया | हालांकि गूगल और फेसबुक एक साल से इस मसौदे के खिलाफ अभियान चला रहे थे और दोनों ने ही अपनी सेवा ऑस्ट्रेलिया में बंद करने की धमकी दी थी |

 

 

 

 

 

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